हैदराबाद। तेलंगाना से एक हृदय विदारक घटना सामने आई है, जहाँ ’10 मिनट डिलीवरी’ के दबाव ने एक और गिग वर्कर की जान ले ली। तेज रफ्तार और समय सीमा के भीतर सामान पहुँचाने की जद्दोजहद में एक डिलीवरी बॉय की सड़क हादसे में दर्दनाक मौत हो गई। इस घटना के बाद पूरे राज्य में गिग वर्कर्स और सामाजिक संगठनों ने भारी हंगामा शुरू कर दिया है, जिससे क्विक-कॉमर्स कंपनियों की कार्यप्रणाली एक बार फिर कटघरे में है।
समय की पाबंदी बनी काल
मिली जानकारी के अनुसार, मृतक युवक एक प्रसिद्ध क्विक-कॉमर्स प्लेटफॉर्म के लिए काम करता था। हादसे के वक्त वह एक ‘अर्जेंट ऑर्डर’ डिलीवर करने के लिए जा रहा था। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि 10 मिनट के भीतर डिलीवरी पूरी करने के दबाव में युवक की बाइक काफी तेज गति में थी। इसी दौरान संतुलन बिगड़ने या किसी अज्ञात वाहन की टक्कर से वह सड़क पर गिर पड़ा और गंभीर रूप से घायल हो गया। अस्पताल ले जाते समय उसने दम तोड़ दिया।
सड़कों पर उतरा गुस्सा, डिलीवरी कंपनियों के खिलाफ नारेबाजी
युवक की मौत की खबर फैलते ही बड़ी संख्या में अन्य डिलीवरी पार्टनर्स और गिग वर्कर्स यूनियन के सदस्य सड़कों पर उतर आए। प्रदर्शनकारियों ने मृतक के परिवार के लिए उचित मुआवजे और ’10 मिनट डिलीवरी’ जैसे खतरनाक वादों को तुरंत बंद करने की मांग की। गुस्साए कर्मियों का कहना है कि कंपनियां ग्राहकों को लुभाने के लिए तो कम समय का दावा करती हैं, लेकिन इसकी भारी कीमत उन वर्कर्स को चुकानी पड़ती है जो अपनी जान जोखिम में डालकर सड़कों पर दौड़ते हैं।
गिग वर्कर्स की सुरक्षा पर बड़ा सवाल
इस हादसे ने गिग इकोनॉमी में काम करने वाले लाखों युवाओं की सुरक्षा और उनके काम करने की परिस्थितियों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
- अवास्तविक लक्ष्य: ट्रैफिक और खराब सड़कों के बीच 10 मिनट में डिलीवरी करना लगभग असंभव है।
- बीमा और लाभ की कमी: अधिकांश गिग वर्कर्स के पास पर्याप्त स्वास्थ्य या जीवन बीमा नहीं होता।
- दंड का डर: समय पर न पहुँचने पर रेटिंग कम होने या ‘पेनल्टी’ लगने के डर से कर्मचारी जान की परवाह नहीं करते।
सरकार और श्रम विभाग से हस्तक्षेप की मांग
तेलंगाना के विभिन्न कर्मचारी संगठनों ने राज्य सरकार से इस मामले में हस्तक्षेप करने और क्विक-कॉमर्स कंपनियों के लिए सख्त गाइडलाइंस बनाने की अपील की है। विशेषज्ञों का तर्क है कि इस तरह के ‘टाइम-बाउंड’ मॉडल ड्राइवरों को यातायात नियमों का उल्लंघन करने के लिए मजबूर करते हैं, जो न केवल उनके लिए बल्कि सड़क पर चलने वाले अन्य लोगों के लिए भी जानलेवा है।
कंपनी का रुख और मुआवजा
फिलहाल संबंधित डिलीवरी कंपनी ने इस घटना पर दुख व्यक्त किया है और मामले की जांच करने की बात कही है। हालांकि, प्रदर्शनकारी तब तक हटने को तैयार नहीं हैं जब तक कि मृतक के आश्रितों को ठोस आर्थिक सहायता और भविष्य के लिए सुरक्षित कार्य नीतियों का आश्वासन नहीं मिल जाता।





