कोलकाता। पश्चिम बंगाल में राजनीतिक रणनीतिकार संस्था आई-पैक (I-PAC) से जुड़े मामले ने अब एक नया और गंभीर मोड़ ले लिया है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और राज्य प्रशासन पर जांच में बाधा डालने और महत्वपूर्ण डिजिटल साक्ष्यों को नष्ट करने का सीधा आरोप लगाया है। इस मामले में कोलकाता पुलिस के साथ हुए हालिया टकराव के बाद, केंद्रीय एजेंसी ने अब इस कानूनी लड़ाई को कलकत्ता उच्च न्यायालय (High Court) ले जाने का फैसला किया है।
जांच की आंच में मुख्यमंत्री कार्यालय
ED के सूत्रों के अनुसार, आई-पैक और राज्य सरकार के बीच हुए कुछ वित्तीय लेनदेन और डेटा साझाकरण की जांच के दौरान ऐसे तथ्य सामने आए हैं जो संदिग्ध हैं। एजेंसी का आरोप है कि जब जांच टीम कुछ महत्वपूर्ण सर्वरों और दस्तावेजों तक पहुँचने की कोशिश कर रही थी, तब राज्य पुलिस और प्रशासन ने ‘प्रोटोकॉल’ के नाम पर न केवल रास्ता रोका, बल्कि उस समय का उपयोग डेटा को डिलीट या छेड़छाड़ करने के लिए किया गया। ED ने इसे न्याय की प्रक्रिया में सीधा हस्तक्षेप करार दिया है।
हाई कोर्ट में क्या होगी ED की मांग?
ED इस मामले में कलकत्ता उच्च न्यायालय में एक याचिका दायर करने जा रही है, जिसमें निम्नलिखित मुख्य बिंदु हो सकते हैं:
- स्वतंत्र जांच की मांग: राज्य पुलिस के हस्तक्षेप को रोकने के लिए अदालत से विशेष सुरक्षा और निर्देश की मांग।
- सीसीटीवी फुटेज की सुरक्षा: छापेमारी के दौरान मुख्यमंत्री कार्यालय और संबंधित ठिकानों के आसपास की गतिविधियों की फुटेज सुरक्षित करने की अपील।
- अवमानना का मामला: जांच में बाधा डालने वाले अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का अनुरोध।
हाई वोल्टेज ड्रामा और पुलिस की भूमिका
बीते दिनों आई-पैक के दफ्तर और उससे जुड़े ठिकानों पर छापेमारी के दौरान कोलकाता की सड़कों पर भारी तनाव देखा गया था। ED का दावा है कि उनके अधिकारियों को घंटों तक बंधक जैसी स्थिति में रखा गया और उन्हें उन कमरों में जाने से रोका गया जहाँ इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य रखे थे। एजेंसी का आरोप है कि यह सब ऊपर से मिले आदेशों के बिना संभव नहीं था, जिससे मुख्यमंत्री की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं।
तृणमूल कांग्रेस (TMC) का पलटवार
दूसरी ओर, तृणमूल कांग्रेस ने इन सभी आरोपों को राजनीति से प्रेरित बताया है। पार्टी प्रवक्ता का कहना है कि केंद्र सरकार लोकसभा चुनावों के मद्देनजर ममता बनर्जी की छवि खराब करने के लिए केंद्रीय एजेंसियों का इस्तेमाल कर रही है। राज्य सरकार का तर्क है कि ED बिना किसी ठोस वारंट या पूर्व सूचना के संवेदनशील क्षेत्रों में प्रवेश करने की कोशिश कर रही थी, जो कानूनी प्रक्रियाओं का उल्लंघन है।
क्यों महत्वपूर्ण है यह मामला?
I-PAC ने बंगाल चुनाव के दौरान तृणमूल कांग्रेस के लिए रणनीतिक काम किया था। ED इस बात की जांच कर रही है कि क्या इस संस्था को किए गए भुगतान में किसी घोटाले की राशि का इस्तेमाल हुआ था या क्या डेटा प्रबंधन के नाम पर कुछ गोपनीय सरकारी जानकारियां साझा की गई थीं। अब हाई कोर्ट के रुख पर सबकी निगाहें टिकी हैं, क्योंकि अदालत का फैसला राज्य और केंद्र के बीच चल रहे इस ‘सत्ता संघर्ष’ की दिशा तय करेगा।





