नई दिल्ली: सीमा पार से बढ़ते ड्रोन खतरों और आंतरिक सुरक्षा की चुनौतियों को देखते हुए भारत सरकार ने देश के महत्वपूर्ण शहरों और घनी आबादी वाले क्षेत्रों को सुरक्षित करने के लिए एक महत्वाकांक्षी रक्षा कवच तैयार किया है। देश के प्रमुख रणनीतिक ठिकानों और नागरिक क्षेत्रों को ड्रोन हमलों से बचाने के लिए अब ‘काउंटर अनमैन्ड एयरक्राफ्ट सिस्टम’ (CUAS) ग्रिड स्थापित किया जा रहा है। इस सुरक्षा घेरे के तहत पहली बार रिहायशी और संवेदनशील इलाकों के पास आधुनिक एयर डिफेंस गन की तैनाती की जाएगी।
क्या है CUAS ग्रिड और यह कैसे करेगा काम?
CUAS ग्रिड एक बहुस्तरीय सुरक्षा तंत्र है जो संदिग्ध ड्रोन का पता लगाने, उसे ट्रैक करने और अंततः उसे बेअसर करने के लिए डिज़ाइन किया गया है। यह ग्रिड मुख्य रूप से दो तरह से काम करेगा:
- सॉफ्ट किल (Soft Kill): इसमें जैमिंग और स्पूफिंग तकनीकों का उपयोग करके ड्रोन के संचार लिंक को तोड़ दिया जाता है, जिससे वह दिशा भटक जाता है या गिर जाता है।
- हार्ड किल (Hard Kill): यदि ड्रोन अत्यधिक खतरनाक साबित होता है, तो उसे हवा में ही नष्ट करने के लिए लेजर हथियारों या एयर डिफेंस गन का उपयोग किया जाएगा।
आबादी वाले क्षेत्रों में एयर डिफेंस गन की जरूरत
हाल के वर्षों में जम्मू-कश्मीर और पंजाब के सीमावर्ती इलाकों में ड्रोन के जरिए हथियार और नशीले पदार्थों की तस्करी की घटनाएं बढ़ी हैं। इसके अलावा, वीवीआईपी ठिकानों और भीड़भाड़ वाले इलाकों पर ‘लो-कॉस्ट ड्रोन’ हमले का खतरा बना रहता है। इस खतरे को देखते हुए, सुरक्षा एजेंसियों ने विशिष्ट स्थानों पर ‘शॉर्ट रेंज’ एयर डिफेंस गन तैनात करने की योजना बनाई है। ये गन आधुनिक रडार से जुड़ी होंगी, जो पलक झपकते ही दुश्मन के ड्रोन को निशाना बनाने में सक्षम हैं।
ग्रिड की प्रमुख विशेषताएं
- 360 डिग्री कवरेज: यह ग्रिड रडार, रेडियो फ्रीक्वेंसी डिटेक्टर और इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल सेंसर से लैस होगा, जो दिन-रात और किसी भी मौसम में छोटे से छोटे ड्रोन को भी पकड़ सकेगा।
- स्वदेशी तकनीक: इस ग्रिड के निर्माण में डीआरडीओ (DRDO) और भारतीय निजी रक्षा कंपनियों की तकनीक को प्राथमिकता दी जा रही है।
- त्वरित प्रतिक्रिया तंत्र: जैसे ही कोई अनधिकृत ड्रोन नो-फ्लाई ज़ोन में प्रवेश करेगा, ग्रिड का कमांड सेंटर सक्रिय हो जाएगा और संबंधित सुरक्षा इकाई को तुरंत कार्रवाई का निर्देश देगा।
सुरक्षा एजेंसियों की तैयारी
गृह मंत्रालय और रक्षा मंत्रालय के समन्वय से इस ग्रिड को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जा रहा है। पहले चरण में देश की राजधानी दिल्ली, महत्वपूर्ण परमाणु प्रतिष्ठानों, हवाई अड्डों और अंतरराष्ट्रीय सीमा से सटे शहरों को इस ग्रिड से कवर किया जा रहा है। सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि ‘एंटी-ड्रोन ग्रिड’ के निर्माण से भारत की हवाई सुरक्षा में एक नया युग शुरू होगा, जिससे भविष्य के ‘ड्रोन युद्ध’ (Drone Warfare) से निपटना आसान हो जाएगा।





