Wednesday, March 4, 2026

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गोवा में AAP को बड़ा झटका: पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अमित पालेकर समेत 5 दिग्गज नेताओं ने छोड़ी पार्टी

पणजी: गोवा की राजनीति में आम आदमी पार्टी (AAP) को नए साल की शुरुआत में एक बड़ा रणनीतिक झटका लगा है। पार्टी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और 2022 विधानसभा चुनाव में मुख्यमंत्री चेहरा रहे अमित पालेकर ने सोमवार को पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया। पालेकर के साथ-साथ पार्टी के कार्यवाहक अध्यक्ष श्रीकृष्ण परब और तीन अन्य वरिष्ठ पदाधिकारियों ने भी सामूहिक रूप से पार्टी छोड़ दी है, जिससे राज्य में पार्टी के अस्तित्व पर सवालिया निशान खड़े हो गए हैं।

इस्तीफे की मुख्य वजह: ‘ऊपर से थोपे जा रहे फैसले’

अमित पालेकर ने पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल को भेजे अपने इस्तीफे में गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि पार्टी के भीतर अब आपसी विमर्श और जमीनी कार्यकर्ताओं की राय की कोई जगह नहीं बची है।

  • तानाशाही का आरोप: पालेकर ने स्पष्ट किया कि पार्टी में सभी महत्वपूर्ण फैसले अब ‘ऊपर’ (दिल्ली नेतृत्व) से लिए जा रहे हैं, जिन्हें स्थानीय नेताओं पर थोपा जाता है।
  • आत्मसम्मान का हवाला: उन्होंने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा, “यह फैसला गहरे आत्मनिरीक्षण के बाद लिया गया है। मेरे लिए सिद्धांतों और कार्यकर्ताओं का आत्मसम्मान किसी भी पद से ऊपर है।”

जिला पंचायत चुनावों में हार का असर

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस सामूहिक इस्तीफे की पटकथा हाल ही में संपन्न हुए जिला पंचायत (ZP) चुनावों के बाद ही लिख दी गई थी।

  • इन चुनावों में ‘आप’ ने 50 में से 42 सीटों पर चुनाव लड़ा था, लेकिन उसे केवल एक सीट पर जीत हासिल हुई।
  • इस शर्मनाक हार के बाद केंद्रीय नेतृत्व ने अमित पालेकर को प्रदेश अध्यक्ष पद से हटा दिया था, जिससे उनके समर्थकों में भारी नाराजगी थी। उनकी जगह श्रीकृष्ण परब को कार्यवाहक अध्यक्ष बनाया गया था, लेकिन अब उन्होंने भी पालेकर के समर्थन में इस्तीफा दे दिया है।

इन नेताओं ने भी छोड़ी पार्टी:

अमित पालेकर और श्रीकृष्ण परब के अलावा इस्तीफा देने वाले अन्य प्रमुख नामों में शामिल हैं:

  1. रोहन नायक (गोवा ‘आप’ युवा विंग के अध्यक्ष)
  2. दो अन्य राज्य स्तरीय पदाधिकारी।

‘आप’ के लिए भविष्य की चुनौती

गोवा में अपनी जड़ें जमाने की कोशिश कर रही आम आदमी पार्टी के लिए यह एक बड़ी क्षति मानी जा रही है। अमित पालेकर न केवल पार्टी का चेहरा थे, बल्कि भंडार समाज (गोवा का सबसे बड़ा समुदाय) के एक प्रभावी नेता भी हैं। उनके जाने से आगामी चुनावों में पार्टी की सोशल इंजीनियरिंग और चुनावी संभावनाओं को तगड़ा धक्का लग सकता है।

“जब पार्टी में फैसले आपसी सलाह के बजाय थोपे जाने लगें, तो वह संस्था कमजोर होने लगती है। मैंने अपनी क्षमता के अनुसार पार्टी के लिए सर्वश्रेष्ठ किया, लेकिन अब वहां स्पष्टता और विजन का अभाव है।” — अमित पालेकर

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