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‘पैसे लो और अमेरिका छोड़ो’: ट्रंप का अवैध प्रवासियों को अल्टीमेटम, स्वैच्छिक वापसी के लिए $3,000 की पेशकश

वाशिंगटन/न्यू न्यूयॉर्क: अमेरिका के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सत्ता संभालते ही अवैध प्रवासियों को बाहर निकालने की अपनी योजना को धार देना शुरू कर दिया है। क्रिसमस से ठीक पहले ट्रंप प्रशासन की ओर से एक विशेष ‘कैश इंसेंटिव’ योजना का संकेत दिया गया है, जिसके तहत अवैध रूप से रह रहे प्रवासियों को लगभग $3,000 (करीब 2.7 लाख भारतीय रुपये) देकर सम्मानपूर्वक देश छोड़ने का विकल्प दिया जा सकता है।

क्या है ट्रंप की ‘कैश फॉर प्रस्थान’ योजना?

डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया और अपने बयानों के जरिए स्पष्ट किया है कि वे अमेरिका के इतिहास का सबसे बड़ा निर्वासन अभियान चलाने जा रहे हैं।

  • स्वैच्छिक निर्वासन (Voluntary Departure): इस योजना का उद्देश्य उन प्रवासियों को प्रोत्साहित करना है जो बिना किसी कानूनी लड़ाई या बल प्रयोग के खुद ही अमेरिका छोड़ना चाहते हैं।
  • आर्थिक सहायता: प्रस्ताव के अनुसार, जो प्रवासी स्वेच्छा से अपने देश वापस लौटने को तैयार होंगे, उन्हें यात्रा और वहां बसने के शुरुआती खर्च के रूप में लगभग 2.7 लाख रुपये दिए जाएंगे।
  • लागत में कमी: ट्रंप समर्थकों का तर्क है कि एक व्यक्ति को जबरन गिरफ्तार करने, हिरासत में रखने और कानूनी प्रक्रिया के जरिए डिपोर्ट करने पर सरकार का इससे कहीं ज्यादा खर्च आता है। ऐसे में पैसे देकर भेजना एक “सस्ता सौदा” साबित हो सकता है।

क्रिसमस से पहले बढ़ी ‘टेंशन’

ट्रंप के इस सख्त रुख ने उन लाखों परिवारों की खुशियों में खलल डाल दिया है जो वर्षों से बिना वैध दस्तावेजों के अमेरिका में रह रहे हैं।

  • डिटेंशन कैंप की तैयारी: ट्रंप पहले ही कह चुके हैं कि वे सीमा पर आपातकाल घोषित करेंगे और सेना की मदद से प्रवासियों को पकड़ने के लिए बड़े कैंप बनाएंगे।
  • भारतीयों पर भी असर: इस योजना का सीधा असर वहां रह रहे हजारों अवैध भारतीय प्रवासियों पर भी पड़ सकता है, जो ‘डंकी रूट’ या अन्य अवैध तरीकों से अमेरिका पहुंचे हैं।

आलोचना और मानवाधिकारों का सवाल

ट्रंप की इस योजना की अमेरिका के भीतर और बाहर कड़ी आलोचना भी हो रही है।

  • विपक्ष का रुख: डेमोक्रेटिक पार्टी के नेताओं ने इसे ‘अमानवीय’ करार दिया है। उनका कहना है कि पैसे का लालच देकर लोगों को उनके सपनों से दूर करना गलत है।
  • कानूनी चुनौतियां: नागरिक अधिकार संगठनों का मानना है कि इस बड़े स्तर पर निर्वासन को लागू करना इतना आसान नहीं होगा और इसे अदालतों में कड़ी चुनौती दी जाएगी।

आगे क्या होगा?

डोनाल्ड ट्रंप 20 जनवरी को आधिकारिक रूप से शपथ लेने के बाद इन नीतियों पर हस्ताक्षर कर सकते हैं। उन्होंने साफ कर दिया है कि उनकी प्राथमिकता ‘अमेरिका फर्स्ट’ है और वे किसी भी कीमत पर अवैध घुसपैठ को बर्दाश्त नहीं करेंगे। प्रवासियों के पास अब सीमित समय बचा है कि वे कानूनी विकल्पों को तलाशें या इस नई योजना पर विचार करें।

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