Tuesday, March 3, 2026

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इंडोनेशिया: सुमात्रा में मूसलाधार बारिश से भीषण तबाही

इंडोनेशिया का सुमात्रा द्वीप इस समय भीषण प्राकृतिक आपदा की चपेट में है। पिछले सप्ताह हुई मूसलाधार मानसूनी बारिश ने कई इलाकों में तबाही मचा दी। लगातार बारिश से नदी किनारे स्थित बांध टूट गए, जिससे अचानक आई बाढ़ और भूस्खलन की घटनाओं में कम से कम 10 लोगों की मौत हो गई, जबकि छह लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं।

बुधवार को जारी बयान में पुलिस ने बताया कि भारी वर्षा के बाद पहाड़ी क्षेत्रों में कीचड़, चट्टानों और गिरे हुए पेड़ों ने गांवों को बुरी तरह प्रभावित किया है। कई स्थानों पर घरों और सड़क मार्गों पर मलबा भरने के कारण बचाव दल उत्तरी सुमात्रा प्रांत के छह सबसे प्रभावित क्षेत्रों तक पहुंचने के लिए संघर्ष कर रहे हैं।

सबसे गंभीर रूप से प्रभावित इलाकों में सिबोल्गा शहर शामिल है, जहां से बचावकर्मियों ने बुधवार तक कम से कम पांच शव बरामद कर लिए हैं। तीन घायलों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। वहीं, पड़ोसी मध्य तपनौली जिले में भूस्खलन ने कई घरों को तबाह कर दिया। इस हादसे में एक ही परिवार के चार सदस्यों की मौत हो गई। बाढ़ के पानी ने लगभग 2,000 घरों और इमारतों को अपनी चपेट में ले लिया है।

दक्षिण तपनौली जिले में पेड़ों के उखड़ने से एक व्यक्ति की मृत्यु हो गई और एक अन्य घायल हो गया। मंडेलिंग नटाल जिले में भारी बारिश से एक पुल ध्वस्त हो गया और करीब 470 घर जलमग्न हो गए। वहीं, नियास द्वीप में कीचड़ व मलबे के कारण मुख्य सड़क अवरुद्ध हो गई है, जिससे राहत कार्यों में और बाधा आ रही है।

राहत और बचाव कार्यों में चुनौती
सिबोल्गा के पुलिस प्रमुख एडी इंगंटा ने बताया कि प्रभावित क्षेत्रों में आपातकालीन आश्रय स्थल स्थापित किए जा चुके हैं और स्थानीय निवासियों को जल्द से जल्द सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी गई है। उन्होंने चेतावनी दी कि लगातार जारी बारिश से और भूस्खलन की आशंका बनी हुई है। पहाड़ी शहर में अब तक छह भूस्खलन दर्ज किए गए हैं, जिनमें 17 घर और एक कैफे मलबे में समा गए।

इंगंटा के अनुसार खराब मौसम, कीचड़ और क्षतिग्रस्त मार्गों के कारण राहत और बचाव अभियान गंभीर चुनौतियों का सामना कर रहा है। कई जगहों पर पहुंच बाधित है, जिससे लापता लोगों की तलाश और मुश्किल हो गई है।

जावा द्वीप में भी आपदा की मार
इंडोनेशिया की राष्ट्रीय आपदा एजेंसी ने मंगलवार को मुख्य द्वीप जावा के दो जिलों—सिलाकैप और बंजारनेगारा—में 10 दिनों तक चले राहत अभियान की आधिकारिक समाप्ति की घोषणा की थी। इन दोनों जिलों में भारी बारिश से हुए भूस्खलन में 38 लोगों की मौत हो गई थी, और 1,000 से अधिक बचावकर्मियों को तैनात करना पड़ा था।

लेकिन राहत कार्य समाप्त होने के कुछ ही घंटे बाद सुमात्रा में बारिश की वजह से आई नई बाढ़ और भूस्खलन की घटनाओं ने फिर से पूरे देश का ध्यान प्राकृतिक आपदाओं पर खींच लिया है।

इंडोनेशिया में हर साल मानसून के दौरान बाढ़ और भूस्खलन की घटनाएं बड़ी संख्या में जान-माल का नुकसान करती हैं। विशेषज्ञों के अनुसार जलवायु परिवर्तन और अनियंत्रित निर्माण कार्यों ने इन घटनाओं की तीव्रता को और बढ़ा दिया है।

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