Tuesday, March 3, 2026

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ट्रैकिंग के दौरान रास्ता भटके युवक: “चट्टान ही आखिरी सहारा…” कहकर विदा ले रहे थे, तभी मिली मदद और ऐसे बची जान

महाराष्ट्र के ठाणे जिले स्थित गोरखगढ़ किले की दुर्गम व रोमांचक ट्रैकिंग दो उत्तराखंडी युवकों के लिए जीवन-मृत्यु का क्षण बन गई। रास्ता भटककर गहरी खाई में फंसे दोनों युवकों ने जब बाहर निकलने की उम्मीद छोड़ दी, तभी अंधेरे में दूर से आई आवाज ने उनकी जिंदगी को नई दिशा दे दी। करीब छह घंटे तक चले रेस्क्यू अभियान ने उन्हें सुरक्षित बाहर निकाल लिया।

रुड़की के श्यामनगर निवासी मयंक वर्मा, जो मुंबई विश्वविद्यालय में पोस्ट ग्रेजुएट छात्र हैं, अपने दोस्त जसपुर निवासी रजत बंसल के साथ 23 नवंबर को दोपहर करीब 1.30 बजे गोरखगढ़ किले की चढ़ाई के लिए निकले थे। यह किला अपनी खड़ी एवं जोखिम भरी पर्वत ढलानों के कारण ट्रैकर्स के बीच खासा लोकप्रिय है। दोनों युवक उत्साह के साथ ट्रैक पर आगे बढ़ते रहे, लेकिन जैसे-जैसे दिन ढलने लगा, उन्हें महसूस हुआ कि वे शाम तक किले तक नहीं पहुंच पाएंगे। एहतियातन उन्होंने वापसी का निर्णय लिया, परंतु उतरते समय घुमावदार चट्टानी रास्तों में भटक गए और अनजाने में गहरी घाटी की ओर नीचे उतर गए।

कुछ ही देर में स्थिति भयावह हो गई—न आगे कोई रास्ता, न पीछे लौटने की जगह। सांसें तेज होने लगीं और चारों ओर घना अंधेरा फैल गया। तभी पुणे से आए कुछ पर्यटकों ने उनकी मदद के लिए पुकार सुन ली और ऊंचाई से आवाज लगाकर उनका हौसला बढ़ाने की कोशिश की। आवाजों का पीछा करते हुए दोनों युवक ऊपर चढ़ने लगे, लेकिन वे एक ऐसे संकरे और खतरनाक हिस्से में जा फंसे जहाँ से न ऊपर चढ़ना संभव था और न नीचे उतरना। वहीं पर्यटक भी नीचे उतरकर उनकी मदद नहीं कर सकते थे।

इसी बीच मयंक ने देखा कि मोबाइल में थोड़ी बैटरी बची है। उन्होंने अंधेरे में एक भावुक वीडियो रिकॉर्ड किया, जिसमें वे कहते दिखाई दिए—“ये चट्टान ही हमारा आखिरी सहारा है।” इसके बाद उन्होंने रुड़की में अपने मित्र संजीव भटनागर को फोन कर स्थिति बताई। संजीव ने तुरंत महाराष्ट्र पुलिस, रेस्क्यू पोर्टल और अन्य संबंधित एजेंसियों से संपर्क कर मदद की गुहार लगाई।

मदद की सूचना मिलते ही मुरबाड के तहसीलदार देशमुख और स्थानीय पुलिस टीम मौके की ओर रवाना हुई। पर्यटक भी रेस्क्यू टीम आने तक वहीं डटे रहे। अंधेरी और कठिन परिस्थितियों के बीच रस्सियों की मदद से बचाव दल ने खतरनाक खाई तक पहुंचकर दोनों युवकों को सुरक्षित निकालने के लिए लगातार प्रयास किए। रात करीब 9 बजे दोनों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। रेस्क्यू टीम ने पूरे अभियान के दौरान दोनों युवकों के साथ अत्यंत संवेदनशीलता और धैर्य का व्यवहार किया।

महाराष्ट्र पुलिस ने दी आधिकारिक जानकारी
महाराष्ट्र पुलिस ने बताया कि उत्तराखंड से आए दोनों युवक एक गहरी घाटी में ऐसी जगह फंस गए थे, जहाँ से ऊपर या नीचे जाना संभव नहीं था। सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस और प्रशासनिक दल तुरंत मौके पर पहुंचे। कुसुम विशे सहमगिरी रेस्क्यू टीम के सहयोग से जोखिम भरे ऑपरेशन को सफलतापूर्वक पूरा करते हुए रात में दोनों युवकों को सुरक्षित बाहर निकाला गया।

गोरखगढ़ किला: रोमांचक लेकिन चुनौतीपूर्ण ट्रैक
गोरखगढ़ किला ठाणे जिले में स्थित एक प्राचीन पहाड़ी किला है, जिसका नाम संत गोरखनाथ की तपस्या स्थली होने के कारण प्रसिद्ध है। इसकी खड़ी ढलानें, संकरी पगडंडियाँ और साहसिक मार्ग इसे ट्रैकर्स के लिए रोमांचक बनाते हैं। यहां से सह्याद्रि पर्वत श्रृंखला के 360 डिग्री दृश्य दिखाई देते हैं, जो इसे प्रकृति प्रेमियों का पसंदीदा गंतव्य बनाते हैं।

दुर्गम परिस्थितियों में लगभग निराश हो चुके दोनों युवकों की जान जिस तरह बचाई गई, वह स्थानीय पुलिस, रेस्क्यू टीम और पर्यटकों की सतर्कता व समन्वय का सराहनीय उदाहरण है।

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