अमेरिका ने दुनिया को आगाह किया है कि चीन अत्याधुनिक तकनीकों के क्षेत्र में तीव्र गति से बढ़त बना रहा है और यह आने वाले समय में वैश्विक शक्ति संतुलन को प्रभावित कर सकता है। अमेरिकी कांग्रेस को सौंपी गई यूएस–चीन आर्थिक एवं सुरक्षा समीक्षा आयोग (USCC) की वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार, चीन अब सिर्फ वैश्विक विनिर्माण केंद्र नहीं, बल्कि उच्च तकनीक और नवाचार वाली अर्थव्यवस्था का नेतृत्व करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि चीन ने “इंटरलॉकिंग इनोवेशन फ्लाईव्हील्स” नामक मॉडल अपनाया है, जिसके तहत एक क्षेत्र में हुई प्रगति अन्य तकनीकी क्षेत्रों को भी तेजी से आगे बढ़ाने में मदद करती है। यह प्रणाली शोध, विज्ञान, उद्योग, उत्पादन और रक्षा के बीच मजबूत तालमेल बनाती है, जिससे चीन की तकनीकी क्षमता लगातार बढ़ रही है।
USCC रिपोर्ट के अनुसार, चीन रोबोटिक्स, क्वांटम तकनीक, बायोटेक्नोलॉजी और एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग जैसे क्षेत्रों में विशेष रूप से मजबूत स्थिति में पहुँच रहा है। अनुमान है कि इन सेक्टरों में नेतृत्व प्राप्त कर चीन भविष्य की विश्व अर्थव्यवस्था और सुरक्षा पर निर्णायक प्रभाव डाल सकता है। रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि यदि अमेरिका और उसके सहयोगी देशों ने समन्वित रणनीति नहीं अपनाई, तो इन तकनीकी क्षेत्रों में चीन की बढ़त को रोकना मुश्किल हो जाएगा।
रिपोर्ट बताती है कि 2015 के बाद से चीन ने राष्ट्रीय स्तर के तकनीकी मिशनों, विशाल सरकारी धनराशि, दीर्घकालिक केंद्रीय योजनाओं और तेज नीति-क्रियान्वयन के माध्यम से अपने वैज्ञानिक और औद्योगिक ढांचे को अभूतपूर्व गति से मजबूत किया है। इन तत्वों ने चीन को उसकी पिछली नीतिगत कमियों से उबारते हुए उसे वैश्विक स्तर पर एक शक्तिशाली नवाचार-व्यवस्था में बदल दिया है।
अमेरिका के लिए यह प्रतिस्पर्धा अब केवल व्यापार तक सीमित नहीं है, बल्कि वह राष्ट्रीय सुरक्षा और सैन्य क्षमता से भी सीधे जुड़ गई है। उभरती तकनीकें आज वैश्विक नेतृत्व और भू-राजनीतिक प्रभाव की नई परिभाषा तय कर रही हैं, और इसी संदर्भ में चीन की बढ़ती तकनीकी पकड़ अमेरिकी रणनीतिक चिंताओं का प्रमुख कारण बन गई है।
रिपोर्ट के निष्कर्ष में कहा गया है कि आने वाला दशक केवल आर्थिक विकास का नहीं, बल्कि उच्च तकनीक आधारित प्रभुत्व की होड़ का होगा। यदि वर्तमान रफ्तार जारी रहती है, तो चीन बहुत जल्द विश्व तकनीकी नेतृत्व के केंद्र में पहुँच सकता है और इसके व्यापक परिणाम पूरी वैश्विक व्यवस्था पर पड़ेंगे।





