Tuesday, March 3, 2026

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नासा ने खोजा सौरमंडल से भी अधिक प्राचीन अंतरतारकीय धूमकेतु; एलियन तकनीक के दावे खारिज

अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने एक अत्यंत दुर्लभ और वैज्ञानिक रूप से महत्वपूर्ण अंतरतारकीय धूमकेतु की पुष्टि की है। ‘थ्री आई–एटलस’ (3I/ATLAS) नामक यह धूमकेतु हमारे सौरमंडल से भी अधिक प्राचीन माना जा रहा है और वर्तमान में पृथ्वी के निकट से सुरक्षित दूरी पर गुजर रहा है। वैज्ञानिकों का मानना है कि इसके अध्ययन से अंतरिक्ष की उत्पत्ति और अन्य तारकीय प्रणालियों के निर्माण को समझने में नए आयाम खुल सकते हैं।

इस धूमकेतु का पता जुलाई 2024 में चिली स्थित एटीएलएएस (Asteroid Terrestrial-impact Last Alert System) टेलीस्कोप से चला। कक्षा विश्लेषण के बाद पाया गया कि यह सौरमंडल के गुरुत्वाकर्षण से बंधा शरीर नहीं है, बल्कि किसी दूरस्थ तारा-तंत्र से आया है। अक्टूबर–नवंबर में प्राप्त स्पष्ट आंकड़ों के आधार पर नासा ने इसे अंतरतारकीय धूमकेतु के रूप में आधिकारिक रूप से पुष्टि की।

मानव इतिहास में अब तक ऐसी केवल तीन वस्तुएं दर्ज की गई हैं जो अन्य तारकीय प्रणालियों से हमारे सौरमंडल में प्रवेश कर चुकी हैं — 1I/‘ओउमुआमुआ’ (2017), 2I/बोरिसोव (2019) और तीसरी 3I/एटलस (2024)। वैज्ञानिकों के अनुसार ये पिंड कुछ समय के लिए सौरमंडल से होकर गुजरते हैं और फिर अपनी यात्रा आगे बढ़ाते हैं।

नासा द्वारा जारी नवीनतम तस्वीरों में 3I–एटलस की कोमा (गैस और धूल से बना बादल) और धूमकेतु की पूंछ स्पष्ट रूप से दिखाई देती है, जिससे यह स्थापित होता है कि यह एक पूरी तरह प्राकृतिक धूमकेतु है। बर्फ, गैस, चट्टानों और धूल से बने धूमकेतु सूर्य के निकट आने पर गर्मी के कारण अधिक चमकदार दिखाई देते हैं।

कुछ वैज्ञानिकों द्वारा इसे किसी उन्नत एलियन तकनीक से जुड़े पिंड के रूप में वर्णित करने के दावों पर नासा ने स्पष्ट प्रतिक्रिया दी है। एजेंसी ने कहा कि “यह संरचना और व्यवहार दोनों की दृष्टि से धूमकेतु है, तथा किसी तकनीकी सक्रियता का कोई प्रमाण मौजूद नहीं है।”

नासा ने यह भी स्पष्ट किया कि यह धूमकेतु पृथ्वी के लिए बिल्कुल भी खतरा नहीं है। यह लगभग 27.5 करोड़ किलोमीटर की सुरक्षित दूरी से गुजर रहा है और निकटतम दूरी अक्टूबर में थी। अब यह सौरमंडल की बाहरी सीमाओं की ओर बढ़ते हुए अपनी अंतरतारकीय यात्रा पुनः जारी रखेगा।

खगोलविदों का मत है कि 3I–एटलस जैसे पिंडों का अध्ययन भविष्य में तारों, ग्रहों और ब्रह्मांडीय संरचनाओं की उत्पत्ति को समझने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

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