नई दिल्ली। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) आने वाले महीनों में अपनी क्षमताओं का विस्तार करते हुए अंतरिक्ष गतिविधियों की रफ्तार को उल्लेखनीय रूप से तेज करने जा रहा है। संगठन ने अंतरिक्षयानों के उत्पादन को तीन गुना बढ़ाने का निर्णय लिया है। साथ ही मौजूदा वित्तीय वर्ष के भीतर सात और प्रमुख प्रक्षेपण करने की तैयारी लगभग पूरी कर ली गई है। इस कदम को भारत की वैश्विक स्पेस इंडस्ट्री में बढ़ती भागीदारी और आत्मनिर्भरता की दिशा में महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखा जा रहा है।
इसरो के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, संगठन न केवल अपने वार्षिक प्रक्षेपण कार्यक्रम को दोगुना करना चाहता है, बल्कि दीर्घकालीन मिशनों को समयबद्ध तरीके से पूरा करने के लिए उत्पादन क्षमता बढ़ाना भी उसकी शीर्ष प्राथमिकता है। अंतरिक्षयानों का निर्माण बढ़ने से उपग्रह-आधारित संचार, पृथ्वी अवलोकन और नेविगेशन सेवाओं को गति मिलेगी।
सरकार ने भी अंतरिक्ष क्षेत्र में निजी कंपनियों की भागीदारी को प्रोत्साहित किया है, जिससे भारत में स्पेस टेक्नोलॉजी के विकास और वैश्विक प्रतिस्पर्धा में मजबूती का नया अध्याय खुला है।
सूत्रों के मुताबिक, बढ़ी हुई उत्पादन क्षमता का बड़ा हिस्सा गगनयान मानव अंतरिक्ष मिशन, नेविगेशन सैटेलाइट्स और संचार उपग्रहों जैसे अहम कार्यक्रमों के समर्थन में उपयोग किया जाएगा।
इसरो ने हाल के महीनों में कई सफल परीक्षण पूरे किए हैं और आगे की उड़ानों के लिए आवश्यक तैयारियों को अंतिम रूप दिया जा रहा है।
इस वित्तीय वर्ष में सात और मिशनों की लॉन्चिंग प्रस्तावित है। इनमें पृथ्वी अवलोकन उपग्रह, व्यावसायिक पेलोड, वैज्ञानिक मिशन और नेविगेशन उपग्रह शामिल हो सकते हैं। श्रीहरिकोटा व अन्य प्रक्षेपण स्थलों पर लॉन्च कॉम्प्लेक्स को उन्नत किया गया है, ताकि बढ़ती लॉन्च आवृत्ति को संभाला जा सके।
हाल के वर्षों में कम लागत और उच्च विश्वसनीयता के कारण भारत अंतरिक्ष सेवाओं के लिए दुनिया भर में पसंदीदा केंद्र बनकर उभरा है। अनेक देश अपने उपग्रहों को प्रक्षेपित करने के लिए भारतीय प्रक्षेपण वाहनों का उपयोग कर रहे हैं।
उत्पादन बढ़ने से भारत न केवल अपने घरेलू लक्ष्यों को पूरा करेगा, बल्कि अंतरराष्ट्रीय बाजार की मांगों को भी बेहतर रूप से पूरा कर सकेगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि अंतरिक्षयानों के उत्पादन को तीन गुना करना और सात नए प्रक्षेपणों की योजना केंद्र सरकार की ‘आत्मनिर्भर भारत’ नीति के अनुरूप है। इससे स्पेस सेक्टर में रोजगार, अनुसंधान और तकनीकी नवाचार को गहरा प्रोत्साहन मिलने की उम्मीद है।
इसरो की यह रणनीति भारत को उन देशों की पंक्ति में मजबूती से खड़ा करती है, जो अंतरिक्ष तकनीक को भविष्य के आर्थिक विकास तथा सामरिक मजबूती के प्रमुख आधार के रूप में देख रहे हैं।





