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यूक्रेन: बाहरी बिजली आपूर्ति रुकने से परमाणु संयंत्र पर बढ़ा खतरा, जेलेंस्की और IAEA ने दी चेतावनी

कीव/वीना।
यूक्रेन में चल रहे संघर्ष के बीच देश के परमाणु ऊर्जा संयंत्रों को लेकर गंभीर चेतावनी दी गई है। राष्ट्रपति वलोडिमिर जेलेंस्की और अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) ने स्पष्ट किया है कि यदि बाहरी बिजली आपूर्ति बाधित होती रही, तो यह संयंत्रों के संचालन और सुरक्षा पर गंभीर खतरा पैदा कर सकता है।

बाहरी बिजली आपूर्ति रुकने का असर
यूक्रेनी अधिकारियों के अनुसार, कुछ परमाणु संयंत्रों की मुख्य पावर लाइनें आंशिक रूप से बाधित हो गई हैं। इन संयंत्रों में कूलिंग सिस्टम और आपातकालीन उपकरणों के लिए लगातार बिजली की जरूरत होती है। बाहरी आपूर्ति रुकने पर इन सिस्टम का निर्बाध संचालन प्रभावित हो सकता है, जिससे रेडिएशन रिस्क और तकनीकी आपात स्थिति पैदा होने का खतरा बढ़ जाता है।

राष्ट्रपति जेलेंस्की की चेतावनी
राष्ट्रपति जेलेंस्की ने कहा, “परमाणु संयंत्रों की सुरक्षा हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। बाहरी बिजली की आपूर्ति रुकने से हम एक बड़े हादसे का सामना कर सकते हैं। हम अंतरराष्ट्रीय समुदाय से तत्काल सहायता की अपील कर रहे हैं।”

IAEA ने भी जताई चिंता
अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) ने बयान जारी कर कहा कि संयंत्रों की सुरक्षा और स्थिर संचालन के लिए बिजली आपूर्ति का निरंतर होना आवश्यक है। एजेंसी ने यूक्रेन से अनुरोध किया है कि वह आवश्यक संसाधनों और तकनीकी सहायता को सुनिश्चित करे।

संभावित खतरे और सुरक्षा उपाय
विशेषज्ञों के अनुसार, यदि बाहरी बिजली बंद रहती है तो संयंत्रों के कूलिंग सिस्टम प्रभावित होंगे। इसके परिणामस्वरूप रेडिएशन रिस्क बढ़ सकता है और आसपास के क्षेत्रों में आपातकालीन स्थिति उत्पन्न हो सकती है। यूक्रेनी अधिकारियों ने बताया कि आपातकालीन जनरेटर और बैकअप सिस्टम सक्रिय हैं, लेकिन ये लंबे समय तक पूरी तरह सुरक्षित संचालन सुनिश्चित नहीं कर सकते।

अंतरराष्ट्रीय सहयोग की आवश्यकता
विशेषज्ञों ने चेताया कि इस समय अंतरराष्ट्रीय सहयोग बेहद जरूरी है। यूरोपीय और अमेरिकी टीमों को तकनीकी मदद और बिजली आपूर्ति के वैकल्पिक साधन उपलब्ध कराने की आवश्यकता है। ताकि संयंत्र सुरक्षित रहे और किसी भी तरह का रेडिएशन रिस्क रोका जा सके।

स्थिति अभी भी संवेदनशील
यूक्रेन में संघर्ष जारी है और संयंत्रों की सुरक्षा के लिए निगरानी बढ़ा दी गई है। राष्ट्रपति जेलेंस्की और IAEA ने बार-बार चेताया है कि जल्द ही ठोस कदम न उठाए गए तो यह सिर्फ राष्ट्रीय नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी गंभीर संकट बन सकता है।

 

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