नई दिल्ली/न्यूयॉर्क। संयुक्त राष्ट्र महासभा (यूएनजीए) के 80वें सत्र के दौरान अमेरिका और रूस के विदेश मंत्रियों के बीच महत्वपूर्ण बातचीत हुई। अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो और रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव की यह मुलाकात महासभा के सत्र के इतर हुई, जिसकी पुष्टि रूस के विदेश मंत्रालय ने बुधवार को की।
महासभा में प्रमुख नेताओं का संबोधन
यूएनजीए के दूसरे दिन दुनिया के कई शीर्ष नेता सभा को संबोधित किए। इसमें यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की, ईरान के मसूद पेजेश्कियान, अर्जेंटीना के जेवियर माईली और सीरिया के अंतरिम नेता अहमद अल-शरा शामिल रहे। यह भी उल्लेखनीय है कि महासभा के मंच पर 60 वर्षों में पहली बार किसी सीरियाई नेता ने भाषण दिया।
जेलेंस्की का सख्त संदेश
यूक्रेनी राष्ट्रपति जेलेंस्की ने रूस के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि वैश्विक परिदृश्य में कई देश या तो युद्ध की मार झेल रहे हैं, या युद्ध से उबर रहे हैं, या युद्ध को रोकने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने अमेरिकी पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और अन्य वैश्विक नेताओं के साथ हुई पिछली चर्चाओं का हवाला देते हुए कहा कि “हम मिलकर बहुत कुछ बदल सकते हैं। हमें जो समर्थन मिल रहा है, उसके लिए मैं आभारी हूं।”
जेलेंस्की ने सभी देशों से अपील की कि वे रूस की आक्रामकता के खिलाफ खुलकर आवाज उठाएं और अंतरराष्ट्रीय कानून तथा व्यवस्था की रक्षा में यूक्रेन का समर्थन करें। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की संरचना पर भी नाराजगी जताई, जिसमें रूस एक स्थायी सदस्य है और वीटो अधिकार रखता है। जेलेंस्की का कहना था कि “अंतरराष्ट्रीय कानून तभी प्रभावी होता है जब ताकतवर दोस्त इसके लिए खड़े हों।”
जी7 और जी20 का जिक्र
जेलेंस्की ने जी7 और जी20 समूहों का भी उल्लेख किया, लेकिन कहा कि असली जिम्मेदारी पूरे संयुक्त राष्ट्र समुदाय की है, और सभी देशों को मिलकर रूस की आक्रामकता को रोकने में सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए।
अंतरराष्ट्रीय ध्यान
यूएनजीए के इस सत्र में जेलेंस्की का सख्त रुख और अमेरिका-रूस विदेश मंत्रियों की मुलाकात वैश्विक राजनीति में महत्वपूर्ण संकेत मानी जा रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह बैठक रूस-यूक्रेन युद्ध, अंतरराष्ट्रीय कानून और सुरक्षा परिषद की संरचना पर चल रहे बहसों को नया मोड़ दे सकती है।





