ढाका। बांग्लादेश में अगले साल फरवरी में होने वाले आम चुनाव से पहले अंतरिम सरकार और चुनाव आयोग के विवादित फैसले लगातार सुर्खियों में हैं। ताज़ा मामले में चुनाव आयोग ने देश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना और उनके परिवार का राष्ट्रीय पहचान पत्र (NID) लॉक कर दिया है। इसके चलते हसीना आगामी आम चुनाव में मतदान नहीं कर सकेंगी।
चुनाव आयोग ने की पुष्टि
चुनाव आयोग के सचिव अख्तर अहमद ने एक बयान में कहा, “पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना का राष्ट्रीय पहचान पत्र लॉक कर दिया गया है। ऐसे में वह विदेश में बैठकर मतदान नहीं कर सकतीं।” अहमद ने स्पष्ट किया कि NID लॉक होने पर व्यक्ति का मतदान का अधिकार स्वतः समाप्त हो जाता है।
परिवार और करीबियों पर भी कार्रवाई
सिर्फ शेख हसीना ही नहीं, बल्कि उनके परिवार और कुछ करीबी लोगों के NID भी लॉक किए गए हैं। आयोग के एक अधिकारी ने बताया कि हसीना की छोटी बहन शेख रेहाना, बेटे सजीब वाजेद जॉय और बेटी सईमा वाजेद पुतुल के पहचान पत्र भी बंद कर दिए गए हैं।
क्या है NID?
बांग्लादेश में राष्ट्रीय पहचान पत्र (NID) नागरिकों का सबसे अहम दस्तावेज़ है। इसकी मदद से विदेश में रह रहे लोग भी अपने मताधिकार का उपयोग कर सकते हैं। लेकिन अगर किसी का NID लॉक कर दिया जाता है, तो वह वोट नहीं डाल सकता।
चुनाव आयोग का कहना है कि न्याय से बचने के लिए या किसी अन्य कारण से देश छोड़कर बाहर गए लोगों का NID लॉक किया जाता है।
राजनीतिक बहस तेज
विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम स्पष्ट रूप से राजनीतिक रंग लिए हुए है। आलोचकों का कहना है कि अंतरिम सरकार और यूनुस खेमे की नीतियों का सीधा निशाना शेख हसीना और उनकी पार्टी आवामी लीग है। वहीं, हसीना समर्थकों का आरोप है कि यह लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन है और चुनाव को एकतरफा बनाने की कोशिश है।





