तेहरान/नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में तनाव के बीच ईरान ने इस्राइल के लिए कथित जासूसी के आरोप में एक नागरिक को फांसी दे दी है। मृतक की पहचान बाबक शहबाजी के रूप में हुई है। तेहरान की न्यायिक एजेंसी मिजान ने दावा किया कि शहबाजी संवेदनशील सैन्य और सुरक्षा प्रतिष्ठानों से जुड़ी जानकारी इस्राइली एजेंटों तक पहुंचा रहा था।
हालांकि, मानवाधिकार संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इस दावे को खारिज करते हुए आरोप लगाया कि शहबाजी को झूठे केस में फंसाया गया और जेल में अमानवीय यातनाएं देकर अपराध कबूल करने पर मजबूर किया गया।
जेलेंस्की को पत्र के बाद गिरफ्तारी
संगठनों का कहना है कि शहबाजी को तब हिरासत में लिया गया, जब उसने यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की को एक पत्र लिखा था। पत्र में शहबाजी ने रूस के खिलाफ युद्ध में मदद की पेशकश की थी। गौरतलब है कि ईरान रूस को ड्रोन मुहैया कराता रहा है, जिनका इस्तेमाल यूक्रेन पर हमलों में होता रहा है। कार्यकर्ताओं का आरोप है कि जेलेंस्की को लिखा पत्र ही उसके खिलाफ सबूत बनाया गया और इसे “इस्राइल के लिए जासूसी” करार दे दिया गया।
फांसी से पहले चेतावनी
मानवाधिकार संगठन ईरान ह्यूमन राइट्स ने पहले ही आशंका जताई थी कि शहबाजी को मौत की सजा दी जा सकती है। संगठन ने कहा कि ईरानी सरकार ने कानूनी प्रक्रिया और सुनवाई को गोपनीय रखा तथा अंतरराष्ट्रीय मानकों का पालन नहीं किया।
क्या डर का माहौल बना रहा है ईरान?
शहबाजी का मामला अंतरराष्ट्रीय चिंता का विषय बन गया है। कार्यकर्ताओं का कहना है कि हालिया महीनों में ईरान ने इस्राइल से टकराव के बीच अब तक आठ लोगों को जासूसी के आरोप में मौत की सजा दी है। इससे यह आशंका गहराती जा रही है कि सरकार भय और दबाव का माहौल बनाने के लिए मौत की सजाओं का इस्तेमाल कर रही है।
पृष्ठभूमि: ईरान-इस्राइल टकराव
कुछ महीने पहले इस्राइली हवाई हमलों में ईरान के करीब 1,100 लोग मारे गए थे, जिनमें कई वरिष्ठ सैन्य कमांडर भी शामिल थे। जवाबी कार्रवाई में ईरान ने इस्राइल पर मिसाइल दागे थे। तब से दोनों देशों के बीच तनाव और गहरा गया है।
विशेषज्ञ मानते हैं कि इसी तनाव के बीच ईरान में जासूसी के मामलों में फांसी की सजा देकर सरकार जनता और विपक्ष को कड़ा संदेश देना चाहती है।





