नई दिल्ली। बदलते वैश्विक परिदृश्य और बढ़ते सुरक्षा चुनौतियों के बीच भारत के रक्षा सचिव ने शुक्रवार को एक अहम संदेश दिया। उन्होंने कहा कि भारत अब केवल सॉफ्ट पावर यानी संस्कृति, कूटनीति और मानवीय सहयोग तक सीमित नहीं रह सकता, बल्कि समय आ गया है कि देश अपनी हार्ड पावर भी दुनिया के सामने रखे।
वैश्विक परिदृश्य पर जोर
रक्षा सचिव ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय मंच पर आज शक्तिशाली वही राष्ट्र हैं जो कूटनीतिक ताकत के साथ-साथ सैन्य क्षमता भी रखते हैं। भारत ने हमेशा शांति और संवाद को प्राथमिकता दी है, लेकिन मौजूदा समय में यह ज़रूरी है कि देश अपनी सामरिक शक्ति को भी मजबूती से प्रदर्शित करे।
आत्मनिर्भर भारत और रक्षा उत्पादन
उन्होंने रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर भारत अभियान को उल्लेखनीय बताते हुए कहा कि देश की रक्षा उत्पादन क्षमता लगातार बढ़ रही है। स्वदेशी हथियारों और तकनीक के जरिए भारत न केवल अपनी ज़रूरतें पूरी कर रहा है, बल्कि दुनिया के अन्य देशों को भी रक्षा उपकरण निर्यात करने लगा है। यह भारत की हार्ड पावर को नई दिशा देता है।
सुरक्षा चुनौतियाँ और तैयारी
रक्षा सचिव ने पड़ोसी देशों और वैश्विक परिदृश्य का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत को सीमाई चुनौतियों, साइबर सुरक्षा खतरों और समुद्री इलाकों में बढ़ती गतिविधियों से निपटने के लिए लगातार तैयार रहना होगा। इसके लिए मजबूत सैन्य बल, आधुनिक तकनीक और रणनीतिक साझेदारी की आवश्यकता है।
सॉफ्ट पावर के महत्व को भी माना
हालाँकि उन्होंने यह भी कहा कि भारत की सॉफ्ट पावर उसकी पहचान और ताकत रही है। योग, आयुर्वेद, संस्कृति और लोकतांत्रिक मूल्यों ने भारत को विश्व मंच पर एक अलग स्थान दिलाया है। लेकिन आज यह संतुलन बनाने का समय है, जहाँ भारत अपनी शांति प्रिय छवि के साथ-साथ अपनी रक्षा शक्ति का भी परिचय दे।





