वारसॉ/वॉशिंगटन। यूक्रेन युद्ध की आंच अब पोलैंड तक पहुंचने लगी है। देश की सीमा में रूसी ड्रोन की घुसपैठ के बाद पोलैंड ने सुरक्षा को लेकर बड़ा कदम उठाते हुए सेना को हाई अलर्ट पर रखा है। प्रधानमंत्री डोनाल्ड टस्क ने साफ कहा है कि यह घटना पोलैंड की सुरक्षा के लिए खतरे की घंटी है और सरकार सेना को और सशक्त करने के लिए तत्काल कदम उठाएगी।
“सेना होगी और मजबूत” – टस्क
प्रधानमंत्री टस्क ने गुरुवार को बयान जारी कर कहा, “रूस की ओर से लगातार बढ़ रही आक्रामक गतिविधियां हमारे लिए गंभीर चुनौती हैं। पोलैंड अपनी सीमाओं की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं करेगा। सेना को नए हथियार, आधुनिक तकनीक और अतिरिक्त संसाधन मुहैया कराए जाएंगे।” उन्होंने यह भी जोड़ा कि सीमा पर निगरानी और वायु रक्षा प्रणाली को और दुरुस्त किया जाएगा।
अमेरिका ने दी प्रतिक्रिया
इस घटना पर अमेरिका ने भी प्रतिक्रिया दी है। व्हाइट हाउस के प्रवक्ता ने कहा कि अमेरिका अपने नाटो सहयोगी पोलैंड की सुरक्षा को लेकर पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने रूस से “उकसाने वाली गतिविधियों” को तुरंत बंद करने की अपील की। अमेरिका ने यह भी आश्वासन दिया कि यदि जरूरत पड़ी तो पोलैंड को अतिरिक्त सैन्य सहयोग उपलब्ध कराया जाएगा।
बढ़ती चुनौतियां
विशेषज्ञों का कहना है कि रूसी ड्रोन की यह घुसपैठ केवल तकनीकी गलती नहीं बल्कि एक सोची-समझी रणनीति भी हो सकती है, जिससे नाटो देशों की सुरक्षा क्षमता का परीक्षण किया जा रहा है। पिछले कुछ महीनों में पोलैंड ने यूक्रेन को सैन्य और मानवीय सहायता दी है, जिससे रूस की नाराजगी और बढ़ गई है।
जनता में चिंता
ड्रोन घुसपैठ की खबर के बाद पोलैंड के सीमावर्ती इलाकों में दहशत का माहौल है। स्थानीय प्रशासन ने लोगों से सतर्क रहने की अपील की है। वहीं, सरकार का कहना है कि हालात पर पूरी तरह नजर रखी जा रही है और किसी भी प्रकार की स्थिति से निपटने के लिए सभी एजेंसियां तैयार हैं।
नाटो पर बढ़ा दबाव
इस घटना के बाद नाटो पर भी दबाव बढ़ गया है कि वह पोलैंड की सुरक्षा के लिए ठोस कदम उठाए। नाटो चार्टर के अनुच्छेद-5 के तहत किसी भी सदस्य देश पर हमला सभी पर हमला माना जाता है। ऐसे में रूस की ऐसी हरकतों को लेकर आने वाले दिनों में गठबंधन की आपात बैठक बुलाए जाने की संभावना भी जताई जा रही है।





