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‘सुशीला कार्की को फुल सपोर्ट रहेगा’: बालेंद्र शाह ने बताया क्यों ठुकराया नेपाल के पीएम का पद

काठमांडू। नेपाल की राजनीति में बुधवार को बड़ा मोड़ तब आया जब काठमांडू महानगर के मेयर बालेंद्र शाह (बालेन शाह) ने प्रधानमंत्री पद संभालने का प्रस्ताव ठुकरा दिया। शाह ने साफ कहा कि वे देश की सत्ता संभालने से ज्यादा लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा और न्यायपालिका की स्वतंत्रता को मजबूत करने के पक्षधर हैं।

शाह ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि वे पूर्व मुख्य न्यायाधीश सुशीला कार्की को हर संभव समर्थन देंगे और उनकी लड़ाई में कंधे से कंधा मिलाकर खड़े रहेंगे। शाह ने कहा, “मेरा उद्देश्य कुर्सी पाना नहीं, बल्कि उस व्यवस्था की रक्षा करना है जिसके लिए लोग सड़कों पर हैं। सुशीला कार्की न्याय और पारदर्शिता की आवाज हैं। उन्हें फुल सपोर्ट रहेगा।”

गौरतलब है कि नेपाल में हाल के दिनों में राजनीतिक अस्थिरता और व्यापक विरोध प्रदर्शनों के बीच सत्ता परिवर्तन की चर्चाएं तेज थीं। इसी कड़ी में कुछ दलों ने शाह को प्रधानमंत्री पद की जिम्मेदारी लेने का प्रस्ताव दिया था। लेकिन शाह ने इस प्रस्ताव को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि वे राजनीति की मुख्यधारा में सत्ता पाने के लिए नहीं, बल्कि “जनता की आवाज और व्यवस्था सुधार” के लिए संघर्ष कर रहे हैं।

शाह ने मौजूदा नेतृत्व पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार जनता की आकांक्षाओं और जरूरतों से कट गई है और केवल सत्ता बचाने की राजनीति में उलझी हुई है। उन्होंने कहा कि नेपाल को अभी ऐसे नेतृत्व की जरूरत है जो सच्चे अर्थों में पारदर्शिता और जवाबदेही की नींव रख सके।

सुशीला कार्की नेपाल की पहली महिला मुख्य न्यायाधीश रही हैं और हाल के दिनों में उन्होंने भी देश की राजनीतिक और न्यायिक व्यवस्था में सुधार के लिए आवाज बुलंद की है। शाह के समर्थन से उनकी मुहिम को नया बल मिलने की संभावना है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि शाह के फैसले ने नेपाल की मौजूदा राजनीति को नई दिशा दे दी है। जहां एक ओर उन्होंने सत्ता का लालच ठुकराकर जनता का विश्वास जीता है, वहीं दूसरी ओर उन्होंने अपने को एक “व्यवस्था परिवर्तन के प्रतीक” के रूप में स्थापित कर लिया है।

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