उत्तरकाशी जनपद के बड़कोट क्षेत्र में आपदा का नया खतरा सामने आया है। तेलगाड गांव के मुहाने के पास हाल ही में हुए भूस्खलन के चलते दो नई झीलों का निर्माण हो गया है। इन झीलों का पता भारतीय सेना के ड्रोन सर्वेक्षण से चला है। विशेषज्ञों के अनुसार, यदि समय रहते इन झीलों का वैज्ञानिक अध्ययन और प्रबंधन नहीं किया गया तो भविष्य में यह गंभीर आपदा का कारण बन सकती हैं।
जानकारी के अनुसार, बीते दिनों तेलगाड क्षेत्र में बड़े पैमाने पर भूस्खलन हुआ था। इसके चलते पहाड़ से भारी मात्रा में मलबा नीचे आने से जलधारा बाधित हो गई और दो जगहों पर पानी रुककर झील का आकार लेने लगा। सेना की ओर से की गई ड्रोन मैपिंग में इन झीलों की मौजूदगी की पुष्टि हुई है।
स्थानीय प्रशासन और आपदा प्रबंधन विभाग ने झीलों की स्थिति पर गहन नजर रखनी शुरू कर दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि बरसात के मौसम में झीलों का जलस्तर अचानक बढ़ सकता है। यदि दबाव झेलने की क्षमता से अधिक पानी जमा हुआ तो झील टूटने से निचले क्षेत्रों में तबाही मच सकती है।
उत्तरकाशी के जिलाधिकारी ने बताया कि ड्रोन सर्वे से प्राप्त रिपोर्ट राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (SDMA) और जल संसाधन विशेषज्ञों को भेज दी गई है। टीम जल्द ही मौके पर जाकर झीलों की गहराई, चौड़ाई और जलस्तर का वैज्ञानिक अध्ययन करेगी। इसके आधार पर झीलों को सुरक्षित तरीके से नियंत्रित करने के उपाय किए जाएंगे।
स्थानीय ग्रामीणों में झीलों को लेकर चिंता का माहौल है। लोगों का कहना है कि पहले से ही पहाड़ी क्षेत्रों में भूस्खलन और बादल फटने की घटनाएं बढ़ रही हैं। अब नई झीलें बनने से खतरा और भी गंभीर हो गया है। ग्रामीणों ने प्रशासन से स्थायी समाधान की मांग की है।
विशेषज्ञों के अनुसार, हिमालयी क्षेत्रों में भूस्खलन से झीलें बनने की घटनाएं नई नहीं हैं। लेकिन यदि इनकी समय पर पहचान और प्रबंधन न हो, तो अचानक झील टूटने से बाढ़ जैसी स्थिति उत्पन्न हो सकती है। तेलगाड की झीलें भी भविष्य के लिए इसी प्रकार की चुनौती बन सकती हैं।
यह खबर बताती है कि उत्तरकाशी जैसे संवेदनशील जिलों में आपदा प्रबंधन के लिए तकनीक (ड्रोन सर्वेक्षण) कितनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।





