नई दिल्ली। वैश्विक अर्थव्यवस्था में भारत की भूमिका लगातार मजबूत होती जा रही है। भारत की अगुआई वाले ब्रिक्स समूह (ब्राज़ील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका) ने अब औद्योगिक देशों के समूह जी-7 को पीछे छोड़ते हुए बड़ी उपलब्धि हासिल की है। आंकड़ों के मुताबिक, ब्रिक्स देशों का सकल घरेलू उत्पाद (GDP) अब वैश्विक हिस्सेदारी में जी-7 से आगे निकल गया है।
इस बदलाव को विशेषज्ञ नए वैश्विक आर्थिक संतुलन की शुरुआत मान रहे हैं। भारत की तेज़ विकास दर और लगातार बढ़ती जनसंख्या, चीन की औद्योगिक क्षमता और रूस जैसे देशों के ऊर्जा संसाधन मिलकर ब्रिक्स को और मजबूत बना रहे हैं। इसके उलट, जी-7 देशों की विकास दर धीमी हो रही है और उनकी वैश्विक हिस्सेदारी घटती जा रही है।
अमेरिका के जाने-माने अर्थशास्त्री रिचर्ड वूल्फ ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि अगर अमेरिका अपनी आर्थिक नीतियों में सुधार नहीं करता और दुनिया की नई उभरती ताकतों को गंभीरता से नहीं लेता, तो भविष्य में वैश्विक स्तर पर उसका दबदबा और कमजोर हो सकता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि ब्रिक्स का विस्तार भी इस बदलाव का बड़ा कारण है। हाल ही में कई देशों ने इस समूह में शामिल होने की इच्छा जताई है, जिससे इसका प्रभाव और बढ़ने वाला है। भारत की कूटनीतिक और आर्थिक नीतियों ने ब्रिक्स को एक मजबूत और आकर्षक मंच बना दिया है।
आर्थिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले वर्षों में ब्रिक्स देशों का वैश्विक व्यापार, निवेश और निर्णय-निर्माण प्रक्रियाओं पर अधिक प्रभाव देखने को मिलेगा। वहीं, अमेरिका और यूरोपीय देशों के लिए यह संकेत है कि उन्हें बदलते समीकरणों को स्वीकार कर नई रणनीतियां बनानी होंगी।





