यरुशलम/गाजा। इस्राइल और हमास के बीच जारी संघर्ष ने एक और गंभीर मोड़ ले लिया है। इस्राइली सेना ने रविवार को गाजा पट्टी के सबसे बड़े शहर को औपचारिक रूप से ‘युद्ध क्षेत्र’ घोषित कर दिया है। सेना के इस कदम के बाद न केवल आम नागरिकों के लिए हालात और कठिन हो गए हैं बल्कि मानवीय राहत सामग्री की आपूर्ति पर भी रोक लगा दी गई है।
सूत्रों के अनुसार, इस्राइली सेना ने दावा किया है कि शहर के कई इलाकों में हमास के लड़ाके सक्रिय हैं और वहां से इस्राइल पर रॉकेट दागे जा रहे हैं। इसी वजह से सैन्य कार्रवाई को तेज करने और क्षेत्र को युद्ध क्षेत्र घोषित करने का निर्णय लिया गया। इस घोषणा के बाद प्रभावित क्षेत्रों में नागरिकों की आवाजाही पर भी कड़े प्रतिबंध लगाए गए हैं।
मानवीय मदद पर रोक से संयुक्त राष्ट्र और अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने गहरी चिंता जताई है। संयुक्त राष्ट्र के मानवीय मामलों के समन्वय कार्यालय (OCHA) ने कहा है कि गाजा के नागरिक पहले से ही खाद्य सामग्री, दवाओं और पेयजल की कमी से जूझ रहे हैं। अब मानवीय राहत पर रोक लगने से हालात और बिगड़ सकते हैं।
स्थानीय स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि शहर के अस्पतालों में दवाओं और चिकित्सा उपकरणों का भारी संकट है। हजारों लोग विस्थापित होकर अस्थायी शिविरों में रह रहे हैं, जहां जरूरी सुविधाओं का अभाव है।
अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने इस्राइल से अपील की है कि वह मानवीय मदद की आपूर्ति में सहयोग करे और युद्धविराम की दिशा में कदम बढ़ाए। हालांकि इस्राइली सेना का कहना है कि जब तक सुरक्षा हालात काबू में नहीं आते और हमास की गतिविधियां पूरी तरह समाप्त नहीं होतीं, तब तक सैन्य अभियान जारी रहेगा।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस्राइल का यह फैसला गाजा में मानवीय संकट को और गहरा देगा और क्षेत्रीय तनाव को भी बढ़ा सकता है। दूसरी ओर, अरब देशों और यूरोपीय संघ ने भी इस स्थिति पर गंभीर चिंता जताई है।





