Saturday, March 7, 2026

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विदेशी अंतरिक्ष यात्री भारतीय एस्ट्रोनॉट को कैसे देखते हैं? पीएम मोदी संग मुलाकात में शुभांशु शुक्ला ने साझा किए अनुभव

नई दिल्ली। ऐतिहासिक अंतरिक्ष मिशन से लौटने के बाद भारतीय अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। यह मुलाकात भारत की अंतरिक्ष यात्रा के नए अध्याय का गवाह बनी। पीएम मोदी ने इस अवसर का एक वीडियो भी साझा किया, जिसमें शुक्ला ने स्पेस स्टेशन पर अपने अनुभवों के साथ विदेशी अंतरिक्ष यात्रियों की भारतीयों के प्रति सोच पर भी चर्चा की।

शुभांशु शुक्ला ने कहा कि जब भारतीय एस्ट्रोनॉट्स की बात होती है तो विदेशी साथी उनका सम्मान और विश्वास के साथ ज़िक्र करते हैं। उनका मानना है कि भारतीय अंतरिक्ष यात्री अपनी मेहनत, वैज्ञानिक सोच और अनुशासन के लिए अलग पहचान रखते हैं।

स्पेस में शरीर पर असर
शुक्ला ने बताया कि अंतरिक्ष में पहुंचने के बाद शारीरिक बदलाव स्पष्ट दिखाई देते हैं। “दिल की धड़कनें धीमी हो जाती हैं और चार-पांच दिन में शरीर नए वातावरण को अपना लेता है। लेकिन पृथ्वी पर लौटने के बाद सबसे बड़ी चुनौती दोबारा चलने की होती है। चाहे आप कितने भी स्वस्थ हों, शुरुआत में कदम जमाना मुश्किल होता है।”

उन्होंने कहा, “मैं खुद पूरी तरह स्वस्थ था लेकिन जमीन पर पहला कदम रखते ही गिर पड़ा। पैरों को आदेश देना पड़ता है कि अब तुम्हें चलना है।”

स्पेस में अंकुरित बीजों का प्रयोग
खानपान की चुनौतियों पर उन्होंने बताया कि स्पेस स्टेशन पर भोजन सीमित होता है। “मूंग और मेथी को लेकर किया गया प्रयोग काफी सफल रहा। कम जगह और सीमित संसाधनों में इन्हें उगाना आसान है। पानी डालिए और आठ-दस दिन में ये अंकुरित हो जाते हैं। यह भविष्य में स्पेस मिशन के लिए बड़ा समाधान हो सकता है।”

शुभांशु के अनुभवों ने एक बार फिर यह साबित किया कि भारतीय वैज्ञानिक और अंतरिक्ष यात्री न केवल अपने कौशल से बल्कि नई खोजों के जरिये भी दुनिया में विशेष पहचान बना रहे हैं।

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