Thursday, March 5, 2026

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ट्रंप की दो टूक: क्रीमिया भूला दो, नाटो छोड़ो – तभी खत्म होगी रूस-यूक्रेन जंग

 

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस-यूक्रेन युद्ध पर एक बार फिर चौंकाने वाला बयान दिया है। उन्होंने साफ कहा है कि यदि यूक्रेन को युद्ध रोकना है तो उसे क्रीमिया पर अपने दावे से पीछे हटना होगा और नाटो (उत्तर अटलांटिक संधि संगठन) में शामिल होने की कोशिश भी छोड़नी होगी।

ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर पोस्ट करते हुए कहा कि यह जंग साढ़े तीन साल से चल रही है और इसे अब खत्म होना चाहिए। कुछ चीजें कभी नहीं बदलतीं। क्रीमिया रूस के पास ही रहेगा और यूक्रेन को नाटो की सदस्यता नहीं मिलेगी।”

 

क्रीमिया पर ट्रंप का रुख

ट्रंप ने क्रीमिया के मुद्दे को अब “बीते वक्त की बात” बताते हुए इसे बराक ओबामा प्रशासन की नाकामी करार दिया। गौरतलब है कि वर्ष 2014 में रूस ने बिना किसी बड़े सैन्य टकराव के क्रीमिया पर कब्ज़ा कर लिया था। ट्रंप का कहना है कि अब इस पर यूक्रेन का दावा करना अव्यावहारिक है।

 

नाटो सदस्यता पर सख्ती

ट्रंप ने यूक्रेन के नाटो में शामिल होने की संभावना को भी खारिज कर दिया। यूक्रेन लंबे समय से नाटो की सदस्यता चाहता रहा है ताकि उसे पश्चिमी देशों का सामरिक सहयोग और सुरक्षा मिले। लेकिन ट्रंप ने स्पष्ट कर दिया कि नाटो विस्तार रूस की नज़र में सबसे बड़ी सुरक्षा चुनौती है और यही युद्ध का मूल कारण भी है।

 

पुतिन से मुलाकात के बाद संदेश

यह बयान ट्रंप और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच अलास्का में हुई मुलाकात के तुरंत बाद आया है। इस बैठक को कई विश्लेषक “शांति प्रक्रिया की नई शुरुआत” मान रहे हैं।

 

ज़ेलेंस्की का रिएक्शन

यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमिर ज़ेलेंस्की ने ट्रंप की टिप्पणी पर प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि यूक्रेन अपनी संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता से समझौता नहीं करेगा। हालांकि, उन्होंने शांति वार्ता के लिए तैयार रहने की बात दोहराई और ट्रंप की “सुरक्षा गारंटी” की पेशकश का स्वागत किया।

 

यूरोप का समर्थन

इसी बीच यूरोपीय देशों ने यूक्रेन का समर्थन किया है। यूरोपीय संघ के नेताओं का कहना है कि युद्ध खत्म करने की शर्तें केवल यूक्रेन की संप्रभुता को ध्यान में रखकर तय की जानी चाहिए।

ट्रंप के बयान से साफ है कि अमेरिका की विदेश नीति में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। उनका “यथार्थवादी दृष्टिकोण” जहां युद्ध समाप्त करने का एक रास्ता दिखा रहा है, वहीं यह यूक्रेन और पश्चिमी देशों के लिए कड़ा संदेश भी है कि उन्हें अपने दीर्घकालिक लक्ष्यों पर पुनर्विचार करना पड़ सकता है।

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