राष्ट्रीय सम्मेलन में किसान आंदोलन की नई रणनीति पर मंथन, केंद्र की कृषि नीतियों पर बरसे किसान नेता
हल्द्वानी। खेत से लेकर बीज तक के सवालों को लेकर किसान महासभा अब राष्ट्रीय मंच पर हुंकार भरने की तैयारी में है। किसानों की बदहाल स्थिति, कृषि नीतियों और खेती में बढ़ते कॉरपोरेट प्रभाव के मुद्दे पर अखिल भारतीय किसान महासभा का पांचवां राष्ट्रीय सम्मेलन 20-21 सितंबर को जालंधर में होगा। सम्मेलन में शामिल होने के लिए नैनीताल जिले के प्रतिनिधियों का दल रवाना हो गया है।
किसान महासभा के प्रदेश उपाध्यक्ष बहादुर सिंह जंगी ने कहा कि सम्मेलन में देश की खेती और किसानों के सामने खड़े गंभीर संकट पर चर्चा के साथ आंदोलन की आगामी रणनीति तय की जाएगी। उन्होंने केंद्र सरकार के किसान हितैषी होने के दावों पर सवाल उठाते हुए कृषि नीतियों को किसान विरोधी बताया।
डॉ. कैलाश पाण्डेय ने कहा कि असली सवाल यह है कि खेती की व्यवस्था आखिर किसान के हाथ में रहेगी या बड़े कॉरपोरेट के हाथों में जाएगी। उन्होंने भारत-अमेरिका कृषि व्यापार समझौते और प्रस्तावित बीज विधेयक को लेकर विरोध जताते हुए आरोप लगाया कि इससे किसानों, खेत मजदूरों और खाद्य सुरक्षा पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है।
जिला सचिव नैन सिंह कोरंगा ने महंगाई, बेरोजगारी, शिक्षा, भ्रष्टाचार और भूमि-अधिकार जैसे मुद्दे उठाते हुए भाजपा सरकार पर जनता का ध्यान बांटने के लिए विभाजनकारी राजनीति करने का आरोप लगाया। उन्होंने मजदूर-किसान एकता के जरिए सरकार की नीतियों के खिलाफ संघर्ष तेज करने की बात कही।
बिंदुखत्ता, बागजाला, सुल्ताननगरी और पर्वतीय क्षेत्रों से पहुंचे प्रतिनिधि सम्मेलन में नैनीताल जिले की आवाज उठाएंगे। प्रतिनिधिमंडल में बहादुर सिंह जंगी, डॉ. कैलाश पाण्डेय, नैन सिंह कोरंगा, पुष्कर दुबड़िया, किशन बघरी, प्रेम सिंह नयाल, निर्मला शाही, कमल जोशी, परवेज अहमद, उर्मिला मौर्य, दीवान सिंह बर्गली, अमीर चंद, अंबा दत्त बसखेती, त्रिलोक शाह, जयंती नयाल और निशा शामिल हैं।




