नई दिल्ली। केंद्रीय शिक्षा मंत्री प्रल्हाद जोशी ने पांचवें काशी तमिल संगमम् (केटीएस 5.0) के आयोजन की घोषणा की है। यह सांस्कृतिक एवं शैक्षणिक कार्यक्रम 28 नवंबर से 12 दिसंबर 2026 तक आयोजित किया जाएगा। इसका उद्देश्य तमिलनाडु और काशी के बीच प्राचीन सभ्यतागत संबंधों को मजबूत करना और ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ की भावना को बढ़ावा देना है।
शिक्षा मंत्री ने गुरुवार को कार्यक्रम के लिए पंजीकरण पोर्टल भी शुरू किया। इच्छुक प्रतिभागी 22 अक्टूबर से 13 नवंबर तक निर्धारित पोर्टल के माध्यम से आवेदन कर सकते हैं। इसके लिए विद्यार्थियों, शिक्षकों, लेखकों, मीडिया पेशेवरों, कृषि क्षेत्र से जुड़े लोगों, कारीगरों, महिलाओं और आध्यात्मिक विद्वानों सहित सात श्रेणियों में आवेदन आमंत्रित किए गए हैं।
‘तिरुक्कुरल अभ्यास करें’ होगी इस वर्ष की थीम
काशी तमिल संगमम् के पांचवें संस्करण की थीम ‘थिरुक्कुरल पयिल्वोम – तिरुक्कुरल अभ्यास करें’ रखी गई है। इसका उद्देश्य प्राचीन तमिल ग्रंथ तिरुक्कुरल की नैतिक शिक्षाओं और जीवन मूल्यों को देशभर के युवाओं एवं विद्यार्थियों तक पहुंचाना है।
प्रल्हाद जोशी ने कहा कि भारत में प्राचीन काल से ही सांस्कृतिक एकता की मजबूत परंपरा रही है। काशी और रामेश्वरम की धार्मिक यात्राएं उत्तर और दक्षिण भारत के बीच गहरे सांस्कृतिक संबंधों को दर्शाती हैं। यह आयोजन इन्हीं साझा परंपराओं और विरासत को आगे बढ़ाने का माध्यम बनेगा।
एक हजार उच्च शिक्षण संस्थानों में होंगी गतिविधियां
कार्यक्रम के तहत देशभर के एक हजार उच्च शिक्षण संस्थानों में विद्यार्थियों की सहभागिता सुनिश्चित करने की योजना है। इसके अंतर्गत तिरुक्कुरल के अध्ययन, शोध और शैक्षणिक गतिविधियों को बढ़ावा दिया जाएगा। तमिलनाडु के विशेषज्ञ वाराणसी के स्कूलों और कॉलेजों में विद्यार्थियों के लिए संवाद सत्र, प्रश्नोत्तरी और अन्य शैक्षणिक गतिविधियां आयोजित करेंगे।
काशी तमिल संगमम् का पहला संस्करण वर्ष 2022 में आयोजित हुआ था। पिछले आयोजनों के माध्यम से तमिलनाडु और काशी के लोगों को एक-दूसरे की भाषा, संस्कृति, परंपराओं और ज्ञान को समझने का अवसर मिला। पांचवें संस्करण के जरिए इस सांस्कृतिक आदान-प्रदान को और व्यापक बनाने का प्रयास किया जाएगा।





