मुंबई। महाराष्ट्र शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) पेपर लीक मामले की जांच में एक बड़े अंतरराज्यीय नेटवर्क का खुलासा हुआ है। पुलिस को संदेह है कि बिहार का एक फरार आरोपी पिछले करीब 25 वर्षों से महाराष्ट्र, बिहार, उत्तर प्रदेश और झारखंड सहित चार राज्यों में विभिन्न भर्ती एवं प्रतियोगी परीक्षाओं के पेपर लीक कराने वाले गिरोह का संचालन कर रहा है। उसकी तलाश के लिए पुलिस की विशेष टीमें कई राज्यों में छापेमारी कर रही हैं।
मामले में गिरफ्तार तीन आरोपियों को भिवंडी की अदालत ने 6 जुलाई तक पुलिस हिरासत में भेज दिया है। जांच एजेंसियों का मानना है कि यह केवल एक पेपर लीक का मामला नहीं, बल्कि वर्षों से सक्रिय संगठित नेटवर्क का हिस्सा है, जिसने कई सरकारी परीक्षाओं की पारदर्शिता पर सवाल खड़े किए हैं।
पुलिस जांच के अनुसार, गिरोह परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र हासिल कर उन्हें मोटी रकम लेकर अभ्यर्थियों तक पहुंचाता था। महाराष्ट्र TET परीक्षा का प्रश्नपत्र कथित रूप से करीब डेढ़ करोड़ रुपये में बेचने की तैयारी थी। पुलिस को यह भी जानकारी मिली है कि गिरोह के तार विभिन्न राज्यों के एजेंटों और बिचौलियों से जुड़े हुए हैं।
पेपर लीक की जानकारी मिलने के बाद महाराष्ट्र राज्य परीक्षा परिषद ने 28 जून को प्रस्तावित TET परीक्षा स्थगित कर दी थी। इस परीक्षा में छह लाख से अधिक अभ्यर्थियों के शामिल होने की उम्मीद थी। मामले की गंभीरता को देखते हुए विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया गया है, जो नेटवर्क के अन्य सदस्यों और संभावित सहयोगियों की पहचान में जुटा है।
जांच अधिकारियों का कहना है कि फरार मुख्य आरोपी की गिरफ्तारी के बाद कई पुराने पेपर लीक मामलों की भी कड़ियां खुल सकती हैं। पुलिस डिजिटल साक्ष्यों, मोबाइल फोन और वित्तीय लेनदेन की भी जांच कर रही है, ताकि पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश किया जा सके।
राज्य सरकार ने दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का भरोसा दिया है और परीक्षा प्रणाली की सुरक्षा मजबूत करने के लिए अतिरिक्त कदम उठाने की बात कही है। वहीं, इस घटना के बाद प्रतियोगी परीक्षाओं की विश्वसनीयता और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।





