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2027 का चुनाव उत्तराखंडियत और अधिकारों के लिए महत्वपूर्ण: हरीश रावत

देहरादून। उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर राज्य की पहचान, मूल आंदोलनकारियों और वंचित वर्गों के अधिकारों का मुद्दा उठाया है। उन्होंने कहा कि आगामी विधानसभा चुनाव उत्तराखंड के अस्तित्व और उत्तराखंडियत के लिए महत्वपूर्ण पड़ाव होगा।

हरीश रावत ने देहरादून में उत्तराखंड के गांधी इंद्रमणि बडोनी और बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर की प्रतिमाओं पर माल्यार्पण किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि राज्य गठन के ढाई दशक से अधिक समय बीत चुका है और अब उत्तराखंड 27वें वर्ष की ओर बढ़ रहा है। उनके अनुसार, 2027 का चुनाव राज्य आंदोलन की मूल भावना और वंचित वर्गों की आवाज से जुड़े मुद्दों पर चर्चा का अवसर होगा।

विकास मॉडल पर उठाए सवाल

पूर्व मुख्यमंत्री ने प्रदेश सरकार के पिछले 10 वर्षों के कामकाज पर सवाल उठाते हुए कहा कि मूल आंदोलनकारी और दूरदराज के ग्रामीण आज भी कई समस्याओं का सामना कर रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि प्रदेश की बड़ी आबादी अभी भी बुनियादी अधिकारों और संसाधनों तक पर्याप्त पहुंच से वंचित है। ये आंकड़े और दावे हरीश रावत ने अपने संबोधन के दौरान रखे।

उन्होंने कहा कि गरीब, बेरोजगार और प्रशासनिक स्तर पर परेशान लोगों की आवाज को भी प्राथमिकता दिए जाने की जरूरत है। रावत ने राज्य आंदोलन से जुड़े मुद्दों और वंचित वर्गों के अधिकारों के लिए संघर्ष जारी रखने की बात कही।

कार्यकर्ताओं से संघर्ष का आह्वान

हरीश रावत ने इंद्रमणि बडोनी और डॉ. भीमराव आंबेडकर को नमन करते हुए कार्यकर्ताओं और समर्थकों से व्यवस्था परिवर्तन तथा शोषित-वंचित वर्गों के अधिकारों के लिए सड़क से सदन तक संघर्ष करने का आह्वान किया।

उनके बयान में 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर उत्तराखंडियत, राज्य आंदोलन की मूल भावना, रोजगार, संसाधनों तक पहुंच और वंचित वर्गों के अधिकार प्रमुख मुद्दों के रूप में सामने आए।

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