कोलकाता। पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व वाली सरकार अपने पहले बड़े मंत्रिमंडल विस्तार की तैयारी में है। राज्य मंत्रिमंडल का पहला विस्तार 1 जून को होने जा रहा है। इसे लेकर राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं तेज हैं और संभावित नए चेहरों के नामों पर मंथन जारी है।
सूत्रों के अनुसार, सरकार बनने के बाद से ही मंत्रिमंडल विस्तार की संभावना जताई जा रही थी। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने शुरुआती दौर में सीमित मंत्रिपरिषद के साथ सरकार का गठन किया था और कई महत्वपूर्ण विभाग अपने पास रखे थे। अब प्रशासनिक जरूरतों और क्षेत्रीय संतुलन को ध्यान में रखते हुए मंत्रिमंडल का विस्तार किया जा रहा है।
बताया जा रहा है कि विस्तार में संगठन और सरकार के बीच बेहतर समन्वय को प्राथमिकता दी जाएगी। विभिन्न क्षेत्रों और सामाजिक वर्गों को प्रतिनिधित्व देने पर भी जोर रहेगा। नए मंत्रियों के चयन को लेकर पार्टी नेतृत्व लगातार विचार-विमर्श कर रहा है।
मुख्यमंत्री हाल के दिनों में दिल्ली दौरे के दौरान केंद्रीय नेतृत्व से भी मुलाकात कर चुके हैं। माना जा रहा है कि मंत्रिमंडल विस्तार को अंतिम रूप देने से पहले शीर्ष नेतृत्व से विस्तृत चर्चा की गई है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह विस्तार सरकार के कामकाज को गति देने और आगामी राजनीतिक चुनौतियों से निपटने की रणनीति का हिस्सा है।
गौरतलब है कि पश्चिम बंगाल में भाजपा सरकार बनने के बाद यह पहला बड़ा मंत्रिमंडलीय विस्तार होगा। इससे सरकार के प्रशासनिक ढांचे को और मजबूती मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। विस्तार के बाद विभागों के पुनर्वितरण की भी संभावना है, जिससे विभिन्न मंत्रालयों के कामकाज में तेजी लाई जा सके।
राजनीतिक हलकों की नजर अब 1 जून पर टिकी है, जब नए मंत्रियों के नामों की आधिकारिक घोषणा के साथ शुभेंदु सरकार की टीम का विस्तार होगा।





