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₹1,020 करोड़ के कथित भ्रष्टाचार मामले में पूर्व मंत्री केएन नेहरू समेत 13 पर केस, टेंडर में गड़बड़ी का आरोप

चेन्नई। तमिलनाडु में कथित टेंडर घोटाले को लेकर पूर्व मंत्री और डीएमके नेता केएन नेहरू की मुश्किलें बढ़ गई हैं। सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक निदेशालय (DVAC) ने नेहरू समेत 13 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। आरोप है कि वर्ष 2021 से 2025 के बीच नगर प्रशासन एवं जलापूर्ति विभाग से जुड़े सरकारी ठेकों में कथित तौर पर हेरफेर की गई और अवैध रकम की वसूली की गई।

DVAC की प्राथमिकी के अनुसार, इस कथित प्रक्रिया से करीब 1,020 करोड़ रुपये का गलत लाभ होने का आरोप है। जांच एजेंसी का दावा है कि ठेके की प्रक्रिया शुरू होने से पहले ही पसंदीदा ठेकेदारों का चयन कर लिया जाता था। आरोप यह भी है कि ठेकेदारों से अनुबंध की रकम का करीब 7.5 से 10 प्रतिशत कथित तौर पर ‘पार्टी फंड’ के नाम पर लिया जाता था।

13 लोगों को बनाया आरोपी

मामले में केएन नेहरू के अलावा उनके भाई केएन मणिवन्नन और एन रविचंद्रन, करीबी सहयोगी कवी प्रसाद, टीवीएच समूह से जुड़े डी. रमेश और डी. प्रभु, पूर्व टाउन प्लानिंग अधिकारी आर. शशिप्रिया, पूर्व क्षेत्रीय इंजीनियर जी. बालचंद्रन और जी. मुरुगेसन तथा पूर्व विधायक एस. सुदर्शनम और जे.जे. एबेनेजर समेत अन्य लोगों को आरोपी बनाया गया है।

ED की रिपोर्ट के आधार पर जांच

DVAC की कार्रवाई प्रवर्तन निदेशालय (ED) की दिसंबर 2025 में दी गई 258 पन्नों की रिपोर्ट के बाद आगे बढ़ी। रिपोर्ट में सरकारी ठेकों में कथित अनियमितताओं और टेंडर प्रक्रिया में हेरफेर के आरोप लगाए गए थे। जांच के दौरान कथित व्हाट्सऐप चैट, तस्वीरें और लेन-देन से जुड़ी गणना शीट जैसे डिजिटल साक्ष्यों का भी उल्लेख किया गया है।

इससे पहले DVAC ने केएन नेहरू और उनसे जुड़े लोगों के कई ठिकानों पर छापेमारी की थी। एजेंसी ने बड़ी संख्या में दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य जब्त किए थे। वहीं, नेहरू ने आरोपों से इनकार करते हुए कार्रवाई को राजनीतिक दबाव बताया है और

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