इस्लामाबाद। सऊदी अरब पर हूती विद्रोहियों के बढ़ते हमलों के बीच पाकिस्तान के तेवर 24 घंटे के भीतर नरम पड़ते नजर आए हैं। एक दिन पहले पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने चेतावनी दी थी कि यदि यमन का संघर्ष सऊदी क्षेत्र तक फैलता है तो पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्किये के बीच हुआ मक्का रक्षा समझौता सक्रिय हो सकता है। अब पाकिस्तान ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल किसी सैन्य कार्रवाई पर चर्चा नहीं हो रही है।
पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता सज्जाद हैदर खान ने कहा कि मौजूदा समय में मक्का समझौते के तहत किसी सैन्य प्रतिक्रिया पर विचार नहीं किया जा रहा है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि जरूरत पड़ने पर पाकिस्तान समझौते के तहत अपनी जिम्मेदारी निभाएगा। पिछले महीने हुए इस रक्षा समझौते में पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्किये शामिल हैं। समझौते के अनुसार किसी एक सदस्य पर सशस्त्र हमला तीनों देशों पर हमला माना जाएगा।
यह बयान पाकिस्तान के रक्षा मंत्री के उस रुख से अलग है, जिसमें उन्होंने हूतियों को सऊदी अरब की सीमा में संघर्ष फैलाने के खिलाफ चेतावनी दी थी। पाकिस्तान ने हूती हमलों की कड़ी निंदा करते हुए ईरान से भी अपने सहयोगी हूतियों पर लगाम लगाने का आग्रह किया था।
दरअसल, हूतियों ने हाल में सऊदी अरब के खमीस मुशैत एयरबेस और आसपास के तेल प्रतिष्ठानों को निशाना बनाया था। इन हमलों में 73 लोगों के घायल होने की खबर है। जवाब में सऊदी अरब ने यमन में हूती ठिकानों पर हवाई हमले किए हैं।
इस बीच यमन में संघर्ष और तेज हो गया है। हूती विद्रोहियों ने रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण मोखा बंदरगाह पर कब्जा कर लिया है, जिससे लाल सागर और बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य में तनाव बढ़ गया है।
पाकिस्तान का ताजा रुख संकेत देता है कि इस्लामाबाद फिलहाल प्रत्यक्ष सैन्य हस्तक्षेप के बजाय कूटनीतिक रास्ते को प्राथमिकता दे रहा है।





