नई दिल्ली। एक हालिया अंतरराष्ट्रीय आर्थिक रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत 2060 तक वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में चीन को पीछे छोड़ देगा। रिपोर्ट में यह भी अनुमान लगाया गया है कि इस अवधि में भारत की वैश्विक अर्थव्यवस्था में हिस्सेदारी बढ़कर लगभग 13 प्रतिशत तक पहुंच सकती है, जबकि चीन की हिस्सेदारी 12 प्रतिशत के आसपास आ जाएगी।
रिपोर्ट के अनुसार, भारत की तेजी से बढ़ती जनसंख्या, युवा कार्यबल और डिजिटल अर्थव्यवस्था में सुधार इसके आर्थिक विकास को मजबूती देंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर भारत अपनी नीतियों और औद्योगिक उत्पादन में सुधार जारी रखता है, तो वह लंबी अवधि में वैश्विक आर्थिक मंच पर प्रमुख खिलाड़ी बन सकता है।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि चीन की अर्थव्यवस्था में धीमी वृद्धि और वृद्धिशील जनसंख्या इसके वैश्विक GDP शेयर में कमी का कारण बन सकती है। इसके विपरीत, भारत की युवा आबादी और तकनीकी नवाचार इसे दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्था के रूप में उभार सकते हैं।
अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थानों ने सुझाव दिया है कि भारत को शिक्षा, आधारभूत संरचना, स्वास्थ्य और डिजिटल निवेश में निरंतर सुधार करना होगा ताकि यह आर्थिक अवसरों का अधिकतम लाभ उठा सके।
विश्लेषकों का मानना है कि यह बदलाव धीरे-धीरे होगा, लेकिन भारत के लिए यह वैश्विक आर्थिक नेतृत्व की दिशा में एक महत्वपूर्ण संकेत है। रिपोर्ट में यह भी जोड़ा गया है कि भारत की आर्थिक वृद्धि सिर्फ आयात-निर्यात या उद्योग तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि सेवा क्षेत्र, टेक्नोलॉजी और नवाचार में भी वृद्धि देखने को मिलेगी।
इस रिपोर्ट ने नीति निर्माताओं और निवेशकों दोनों के लिए भारत की दीर्घकालिक संभावनाओं को उजागर किया है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर भारत सही नीतियां अपनाता है और आर्थिक सुधारों को प्राथमिकता देता है, तो 2060 तक यह वैश्विक GDP में शीर्ष दो देशों में शामिल हो सकता है।





