नई दिल्ली। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने देश में राजनीतिक संवाद के गिरते स्तर पर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में राजनीतिक दलों और नेताओं के बीच मतभेद स्वाभाविक हैं, लेकिन असहमति जताते समय भाषा की मर्यादा बनाए रखना जरूरी है। उन्होंने राजनीतिक आलोचना का समर्थन करते हुए अपशब्दों और व्यक्तिगत टिप्पणियों से बचने की सलाह दी।
राजनाथ सिंह ने कहा कि वर्तमान समय में राजनीतिक बहस की भाषा का स्तर लगातार नीचे जा रहा है, जो चिंता के साथ-साथ शर्मनाक भी है। उनके मुताबिक, लोकतंत्र में स्वस्थ बहस और तर्क के लिए पर्याप्त जगह होनी चाहिए। सत्ता पक्ष की नीतियों की आलोचना करना विपक्ष का अधिकार है, लेकिन इसके लिए असंसदीय या अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल उचित नहीं है।
रक्षा मंत्री की यह टिप्पणी कांग्रेस नेता राहुल गांधी की ओर से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को लेकर की गई हालिया टिप्पणियों के संदर्भ में आई है। राजनाथ सिंह पहले भी राहुल गांधी की कुछ टिप्पणियों को लेकर आपत्ति जता चुके हैं और उन्हें राजनीतिक मर्यादा के अनुरूप नहीं बताया है।
उन्होंने कहा कि राजनीतिक नेताओं का आचरण और उनकी भाषा जनता के बीच लोकतांत्रिक संस्थाओं की छवि को प्रभावित करती है। ऐसे में सार्वजनिक जीवन में रहने वाले नेताओं की जिम्मेदारी और बढ़ जाती है। राजनीतिक विरोध को व्यक्तिगत कटुता में बदलने के बजाय मुद्दों और नीतियों पर केंद्रित रखना लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए बेहतर होगा।
राजनाथ सिंह की टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब संसद और सार्वजनिक मंचों के साथ-साथ सोशल मीडिया पर भी राजनीतिक बयानबाजी तीखी होती जा रही है। विभिन्न दलों के नेता एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगाते रहे हैं। ऐसे माहौल में रक्षा मंत्री ने राजनीतिक संवाद में संयम और शालीनता बनाए रखने पर जोर दिया है।





