भीमताल (नैनीताल)। कुमाऊं की समृद्ध लोक संस्कृति और प्रकृति संरक्षण की परंपरा का प्रतीक ऐतिहासिक हरेला मेला इस वर्ष 16 जुलाई से भीमताल में आयोजित होगा। छह दिवसीय इस मेले को लेकर तैयारियां तेज हो गई हैं। मेले में खेल प्रतियोगिताओं के साथ ही भव्य सांस्कृतिक कार्यक्रम मुख्य आकर्षण रहेंगे।
हरेला महोत्सव-2026 का आयोजन 16 से 21 जुलाई तक किया जाएगा। मेले में स्थानीय संस्कृति, लोक कला और परंपराओं की झलक देखने को मिलेगी। आयोजन समिति की ओर से विभिन्न कार्यक्रमों की रूपरेखा तैयार की जा रही है, जिसमें सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के साथ खेल गतिविधियां भी शामिल होंगी।
मेले में कुमाऊंनी लोक संस्कृति से जुड़े कार्यक्रम, पारंपरिक प्रस्तुतियां और स्थानीय कलाकारों की भागीदारी लोगों के आकर्षण का केंद्र बनेगी। इसके अलावा युवाओं और खेल प्रेमियों के लिए विभिन्न खेल प्रतियोगिताओं का आयोजन भी किया जाएगा।
हरेला मेला भीमताल की पुरानी सांस्कृतिक पहचान से जुड़ा आयोजन है। यह मेला उत्तराखंड की लोक परंपराओं, हरियाली और कृषि संस्कृति को दर्शाता है। वर्षों से आयोजित हो रहे इस मेले में आसपास के क्षेत्रों के लोग बड़ी संख्या में पहुंचते हैं।
आयोजन को सफल बनाने के लिए प्रशासन और संबंधित विभागों ने तैयारियां शुरू कर दी हैं। मेले में बिजली, पेयजल, सुरक्षा और अन्य व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने पर ध्यान दिया जा रहा है, ताकि आने वाले लोगों को किसी तरह की परेशानी न हो।
स्थानीय जनप्रतिनिधियों और लोगों की ओर से भी मेले को भव्य स्वरूप देने के सुझाव दिए गए हैं। प्रशासन का प्रयास है कि हरेला मेले के माध्यम से उत्तराखंड की संस्कृति और पर्यटन को नई पहचान मिले।
हरेला पर्व को उत्तराखंड में हरियाली, नई फसल और पर्यावरण संरक्षण से जोड़कर देखा जाता है। भीमताल का यह मेला इसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए लोक संस्कृति और सामुदायिक सहभागिता का प्रमुख मंच बन चुका है।





