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भारतीय नौसेना को 20 अत्याधुनिक GNSS जैमर, बढ़ी समुद्री सुरक्षा की तैयारी

नई दिल्ली: भारतीय नौसेना ने अपनी सामरिक क्षमता बढ़ाने के लिए 20 अत्याधुनिक GNSS (Global Navigation Satellite System) जैमर प्राप्त किए हैं। रक्षा मंत्रालय ने इस रक्षा सौदे की पुष्टि की है और बताया कि यह तकनीक समुद्री सुरक्षा और नौसेना अभियानों में रणनीतिक बढ़त प्रदान करेगी।

GNSS जैमर एक प्रकार का इलेक्ट्रॉनिक हथियार है, जो उपग्रह-आधारित नेविगेशन और पोजिशनिंग सिस्टम को ब्लॉक या गुमराह कर सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि आधुनिक युद्ध और समुद्री सुरक्षा में यह उपकरण अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, क्योंकि इससे दुश्मन के मिसाइल और ड्रोन सिस्टम पर प्रभाव डाला जा सकता है।

रक्षा सूत्रों के अनुसार, यह जैमर लंबी दूरी तक काम करने में सक्षम हैं और समुद्री ऑपरेशनों के दौरान नौसेना को नेविगेशन, टारगेटिंग और सुरक्षा में मदद करेंगे। इससे भारतीय नौसेना की सटीकता और रणनीतिक क्षमता में महत्वपूर्ण सुधार होगा।

सौदे के तहत मिली यह तकनीक विदेशी और घरेलू कंपनियों के सहयोग से विकसित की गई है। रक्षा विश्लेषकों का कहना है कि इस प्रकार के उपकरणों से भारतीय नौसेना को तटीय सुरक्षा और महासागरीय अभियानों में फायदा मिलेगा। साथ ही यह क्षेत्रीय प्रतिस्पर्धा में भी भारत की ताकत बढ़ाएगा।

रक्षा मंत्रालय ने बताया कि इस GNSS जैमर डिलीवरी से नौसेना के मौजूदा जहाजों और रणनीतिक अभियानों की सुरक्षा प्रणाली में सुधार होगा। नौसेना के वरिष्ठ अधिकारियों ने कहा कि यह उपकरण विशेष रूप से सीमा पर निगरानी, संवेदनशील इलाकों की सुरक्षा और किसी भी संभावित इलेक्ट्रॉनिक हमले से बचाव में सहायक होंगे।

विशेषज्ञों ने यह भी कहा कि समुद्री क्षेत्र में बढ़ते खतरों और डिजिटल युद्ध की नई तकनीकों के चलते जैमर जैसी आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल अब अपरिहार्य हो गया है। भारतीय नौसेना के लिए यह एक महत्वपूर्ण कदम है, जो उनकी सामरिक श्रेष्ठता को और मजबूत करेगा।

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