नई दिल्ली। वरिष्ठ कांग्रेस नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री कर्ण सिंह ने बांग्लादेश के मौजूदा रुख को लेकर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि यह दुखद और चिंताजनक है कि जिस भारत ने 1971 में बांग्लादेश की स्वतंत्रता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, उसी के प्रति आज वहां नकारात्मक भावनाएं देखने को मिल रही हैं।
कर्ण सिंह ने कहा कि भारत और बांग्लादेश के संबंध ऐतिहासिक और गहरे रहे हैं। 1971 के मुक्ति संग्राम के दौरान भारत ने बांग्लादेश के लोगों का समर्थन किया और बड़ी संख्या में शरणार्थियों को भी आश्रय दिया। ऐसे में दोनों देशों के बीच आपसी विश्वास और सहयोग बनाए रखना क्षेत्रीय शांति के लिए बेहद जरूरी है।
उन्होंने बांग्लादेश में भारत विरोधी रुख को लेकर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि पड़ोसी देशों के बीच संबंध केवल राजनीतिक परिस्थितियों पर निर्भर नहीं होने चाहिए। दोनों देशों के बीच ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और सामाजिक संबंधों को ध्यान में रखते हुए संवाद और सहयोग का रास्ता मजबूत किया जाना चाहिए।
कर्ण सिंह ने कहा कि दक्षिण एशिया की स्थिरता के लिए भारत और बांग्लादेश के बीच अच्छे संबंध महत्वपूर्ण हैं। दोनों देशों के सामने आर्थिक विकास, सीमा सुरक्षा, व्यापार और क्षेत्रीय सहयोग जैसी कई साझा चुनौतियां हैं। इन मुद्दों का समाधान टकराव के बजाय बातचीत और आपसी समझ से किया जाना चाहिए।
उन्होंने उम्मीद जताई कि बांग्लादेश अपने पड़ोसी देशों के साथ संबंधों को व्यापक क्षेत्रीय हितों के नजरिए से देखेगा और भारत के साथ सकारात्मक एवं रचनात्मक संबंधों को आगे बढ़ाने की दिशा में कदम उठाएगा।
कर्ण सिंह की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब भारत-बांग्लादेश संबंधों को लेकर क्षेत्रीय स्तर पर लगातार चर्चा हो रही है। उन्होंने संकेत दिया कि दोनों देशों के बीच पुराने भरोसे को बनाए रखना और आपसी मतभेदों को बातचीत के जरिए दूर करना ही भविष्य के लिए बेहतर रास्ता है।





