नई दिल्ली। देश में लंबित मामलों के त्वरित निपटारे के लिए गठित फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट (FTSC) ने वर्ष 2025 में कुल 66,500 मामलों का निपटारा किया है। कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने लोकसभा में यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इन अदालतों का उद्देश्य गंभीर अपराधों से जुड़े मामलों की सुनवाई में तेजी लाना और पीड़ितों को समय पर न्याय उपलब्ध कराकानून मंत्रालय के अनुसार, फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट में वर्ष 2024 में 85,595 मामलों का निपटारा हुआ था, जबकि 2025 में 66,500 मामलों का निपटारा किया गया। वर्ष 2025 के अंत तक इन अदालतों में लंबित मामलों की संख्या 2,45,579 रही।
लोकसभा में दिए गए जवाब में मेघवाल ने बताया कि फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट योजना के तहत दुष्कर्म और पॉक्सो एक्ट से जुड़े मामलों की सुनवाई को प्राथमिकता दी जाती है। इन अदालतों का गठन न्याय प्रक्रिया को तेज करने और संवेदनशील मामलों में जल्द फैसला सुनिश्चित करने के उद्देश्य से किया गया है।
सरकार के अनुसार, फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट योजना के तहत देश के कई राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में विशेष अदालतें काम कर रही हैं। इन अदालतों को मजबूत करने के लिए केंद्र सरकार वित्तीय सहायता भी उपलब्ध करा रही है।
कानून मंत्री ने कहा कि मामलों के निपटारे की प्रक्रिया में न्यायपालिका की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। अदालतों में लंबित मामलों को कम करने के लिए केंद्र सरकार लगातार बुनियादी ढांचे को मजबूत करने, डिजिटल सुविधाओं के विस्तार और विशेष अदालतों की संख्या बढ़ाने जैसे कदम उठा रही है।
उन्होंने बताया कि न्याय मिलने में देरी को कम करना सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है। फास्ट ट्रैक अदालतों के माध्यम से विशेष श्रेणी के मामलों की सुनवाई में तेजी लाने का प्रयास किया जा रहा है, ताकि पीड़ितों को जल्द राहत मिल सके और न्याय व्यवस्था अधिक प्रभावी बन सके।
हालांकि, लंबित मामलों की संख्या अभी भी बड़ी चुनौती बनी हुई है। सरकार और न्यायपालिका दोनों स्तरों पर मामलों के शीघ्र निपटारे के लिए लगातार सुधारात्मक कदम उठाए जा रहे हैं।





