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प्लास्टिक कचरा वापसी में केदारनाथ सबसे आगे, DDRS मॉडल से उत्तराखंड में स्वच्छता की नई पहल

देहरादून। उत्तराखंड के चारधाम क्षेत्रों में प्लास्टिक कचरे के प्रबंधन को लेकर शुरू किए गए डिजिटल डिपॉजिट रिफंड सिस्टम (DDRS) में केदारनाथ धाम ने बेहतर प्रदर्शन किया है। रिपोर्ट के अनुसार, केदारनाथ ने प्लास्टिक कचरे की वापसी में करीब 85 प्रतिशत सफलता हासिल कर स्वच्छता अभियान में नई मिसाल पेश की है।

DDRS व्यवस्था के तहत श्रद्धालुओं और यात्रियों से प्लास्टिक की बोतलें व अन्य प्लास्टिक सामग्री जमा कराई जाती है। इसके बदले उन्हें निर्धारित राशि वापस की जाती है। इस व्यवस्था का उद्देश्य प्लास्टिक कचरे को खुले में फैलने से रोकना और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देना है।

केदारनाथ धाम हिमालयी क्षेत्र में स्थित प्रमुख धार्मिक स्थलों में शामिल है, जहां हर साल बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। ऐसे संवेदनशील पर्यावरणीय क्षेत्र में बढ़ते प्लास्टिक कचरे को नियंत्रित करना प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती रहा है।

अधिकारियों के अनुसार, DDRS की सफलता को देखते हुए अब इस मॉडल को उत्तराखंड के अन्य प्रमुख पर्यटन और धार्मिक स्थलों तक विस्तार देने की तैयारी है। मसूरी, नैनीताल, हरिद्वार समेत अन्य क्षेत्रों में भी इस व्यवस्था को लागू करने की योजना बनाई जा रही है।

इस पहल से प्लास्टिक कचरे के संग्रहण और पुनर्चक्रण को बढ़ावा मिलेगा। साथ ही यात्रियों में भी पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी की भावना विकसित होगी। चारधाम यात्रा जैसे बड़े धार्मिक आयोजनों में स्वच्छता व्यवस्था को मजबूत करने के लिए यह कदम महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

प्रशासन का मानना है कि डिजिटल तकनीक आधारित यह प्रणाली केवल कचरा प्रबंधन तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और सतत पर्यटन को बढ़ावा देने में भी सहायक साबित होगी। केदारनाथ में मिली सफलता के बाद राज्य के अन्य क्षेत्रों में भी इस मॉडल को अपनाने की तैयारी तेज हो गई है।

उत्तराखंड में धार्मिक पर्यटन के साथ पर्यावरण संरक्षण को संतुलित करने की दिशा में DDRS एक अहम कदम माना जा रहा है। केदारनाथ की पहल अब पूरे प्रदेश के लिए स्वच्छता और जिम्मेदार पर्यटन का उदाहरण बन रही है।

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