नई दिल्ली, ब्यूरो। देश में महंगाई को लेकर वित्त मंत्रालय ने चिंता जताई है। मंत्रालय का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और कमजोर मानसून आने वाले महीनों में महंगाई दर पर दबाव बढ़ा सकते हैं। हालांकि फिलहाल खुदरा महंगाई नियंत्रण में है, लेकिन वैश्विक और घरेलू चुनौतियां स्थिति को प्रभावित कर सकती हैं।
वित्त मंत्रालय की मासिक आर्थिक समीक्षा रिपोर्ट में कहा गया है कि खाद्य वस्तुओं की कीमतों में नरमी और बेहतर आपूर्ति प्रबंधन के कारण हाल के महीनों में महंगाई दर में कमी दर्ज की गई है। इसके बावजूद पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों में संभावित वृद्धि और मानसून की अनिश्चितता जोखिम बने हुए हैं।
रिपोर्ट के अनुसार यदि मानसून सामान्य से कमजोर रहता है तो कृषि उत्पादन प्रभावित हो सकता है। इसका सीधा असर खाद्यान्न, फल-सब्जियों और अन्य आवश्यक वस्तुओं की कीमतों पर पड़ सकता है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों की मांग और अर्थव्यवस्था पर भी असर पड़ने की आशंका है।
वित्त मंत्रालय ने कहा कि वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए चुनौती बने हुए हैं। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए बड़े पैमाने पर आयात पर निर्भर है, ऐसे में तेल की कीमतों में बढ़ोतरी परिवहन और उत्पादन लागत को बढ़ा सकती है। इसका असर आम उपभोक्ताओं तक पहुंच सकता है।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूत बनी हुई है और निवेश गतिविधियों में सुधार देखा जा रहा है। विनिर्माण और सेवा क्षेत्र की सकारात्मक वृद्धि से आर्थिक गतिविधियों को समर्थन मिल रहा है। सरकार द्वारा बुनियादी ढांचे पर बढ़ाया गया खर्च भी विकास दर को मजबूती प्रदान कर रहा है।
मंत्रालय ने भरोसा जताया कि सरकार और भारतीय रिजर्व बैंक महंगाई को नियंत्रित रखने के लिए आवश्यक कदम उठाते रहेंगे। साथ ही खाद्य आपूर्ति प्रबंधन और मूल्य स्थिरता पर लगातार नजर रखी जा रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि आगामी मानसून और अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार की स्थिति आने वाले महीनों में महंगाई की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। ऐसे में सरकार के लिए कीमतों पर नियंत्रण बनाए रखना बड़ी चुनौती हो सकती है।





