काठमांडू। नेपाल की एक अदालत ने बहुचर्चित नकली भूटानी शरणार्थी घोटाले में बड़ा फैसला सुनाते हुए पूर्व उप प्रधानमंत्री टोप बहादुर रायमाझी और पूर्व गृह मंत्री बालकृष्ण खांड समेत कई आरोपियों को दोषी करार दिया है। अदालत ने फर्जी दस्तावेजों के जरिए नेपाली नागरिकों को भूटानी शरणार्थी बताकर विदेश भेजने की धोखाधड़ी से जुड़े मामले में सजा सुनाई।
काठमांडू जिला अदालत के फैसले के अनुसार, पूर्व उप प्रधानमंत्री टोप बहादुर रायमाझी को चार साल की जेल की सजा सुनाई गई है। वहीं, पूर्व गृह मंत्री बालकृष्ण खांड समेत अन्य दोषियों पर भी अदालत ने कार्रवाई की है। इस मामले में कुल 16 लोगों को दोषी ठहराए जाने की जानकारी सामने आई है।
मामला उन नेपाली नागरिकों से जुड़ा है, जिन्हें कथित तौर पर फर्जी दस्तावेज तैयार कर भूटानी शरणार्थी के रूप में पेश किया गया और उन्हें अमेरिका सहित अन्य देशों में पुनर्वास दिलाने का झांसा दिया गया। जांच में सामने आया कि इस कथित नेटवर्क में राजनीतिक नेताओं, सरकारी अधिकारियों और बिचौलियों की भूमिका की जांच की गई।
घोटाले के सामने आने के बाद नेपाल में राजनीतिक हलकों में भारी प्रतिक्रिया हुई थी। कई वरिष्ठ नेताओं और अधिकारियों पर आरोप लगे कि उन्होंने फर्जी पहचान और दस्तावेजों के जरिए लोगों से धन की वसूली करने वाले गिरोह को संरक्षण दिया। पुलिस और जांच एजेंसियों ने मामले में कई गिरफ्तारियां की थीं और लंबे समय तक जांच प्रक्रिया चली।
अदालत के फैसले को नेपाल में भ्रष्टाचार के खिलाफ एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में देखा जा रहा है। राजनीतिक रूप से प्रभावशाली लोगों के शामिल होने के कारण यह मामला लंबे समय से चर्चा में था और इस पर पूरे देश की नजर बनी हुई थी।
फैसले के बाद नेपाल में पारदर्शिता और प्रशासनिक जवाबदेही को लेकर बहस फिर तेज हो गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई से भविष्य में सरकारी तंत्र के दुरुपयोग को रोकने में मदद मिल सकती है।





