नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक के मामलों पर तेजी से न्याय सुनिश्चित करने के लिए बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने घोषणा की है कि नए एंटी-चीटिंग कानून के तहत शुरुआती चरण में चार राज्यों में विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट स्थापित किए जाएंगे, जहां नीट समेत अन्य सार्वजनिक परीक्षाओं में पेपर लीक और नकल से जुड़े मामलों की त्वरित सुनवाई होगी।
सरकार का कहना है कि इन विशेष अदालतों के गठन का उद्देश्य आरोपियों के खिलाफ मुकदमों का शीघ्र निपटारा करना और दोषियों को जल्द सजा दिलाना है। इसके माध्यम से परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता बढ़ाने और छात्रों का विश्वास बहाल करने का प्रयास किया जाएगा।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी कहा है कि युवाओं के भविष्य से बढ़कर कुछ नहीं है और पेपर लीक जैसी घटनाओं को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने भरोसा दिलाया कि ऐसे मामलों में दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई होगी तथा फास्ट ट्रैक अदालतों के जरिए न्याय प्रक्रिया को गति दी जाएगी।
सूत्रों के अनुसार, जिन चार राज्यों में सबसे पहले विशेष अदालतें स्थापित की जाएंगी, वहां हाल के वर्षों में प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़े मामलों की संख्या अधिक रही है। इन अदालतों में पेपर लीक, संगठित नकल, परीक्षा में धोखाधड़ी और नए सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) कानून के तहत दर्ज मामलों की प्राथमिकता के आधार पर सुनवाई होगी।
सरकार ने संकेत दिया है कि यदि यह व्यवस्था प्रभावी साबित होती है तो भविष्य में अन्य राज्यों में भी ऐसे विशेष न्यायालय स्थापित किए जा सकते हैं। हाल के दिनों में नीट पेपर लीक को लेकर देशभर में छात्रों के प्रदर्शन और राजनीतिक बहस के बीच सरकार का यह फैसला परीक्षा प्रणाली को अधिक विश्वसनीय बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।





