नई दिल्ली। देश के माल परिवहन क्षेत्र के लिए मंगलवार का दिन अहम है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज पश्चिमी डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर (WDFC) के अंतिम तीन खंडों को राष्ट्र को समर्पित करेंगे। इसके साथ ही भारत का करीब 2,843 किलोमीटर लंबा डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर (DFC) नेटवर्क पूरी तरह परिचालन में आ जाएगा।
देश में मालगाड़ियों की तेज और निर्बाध आवाजाही के लिए बनाए गए इस नेटवर्क में 1,506 किलोमीटर लंबा पश्चिमी डीएफसी और 1,337 किलोमीटर लंबा पूर्वी डीएफसी शामिल है। पश्चिमी कॉरिडोर दादरी से जवाहरलाल नेहरू पोर्ट (JNPT) तक, जबकि पूर्वी कॉरिडोर लुधियाना से सोननगर तक फैला है।
प्रधानमंत्री गुजरात में WDFC के न्यू सानंद (उत्तर)-न्यू मकरपुरा, न्यू उमरगांव-न्यू सफाले और न्यू सफाले-JNPT खंडों का उद्घाटन करेंगे। इन तीनों खंडों की कुल लंबाई 326 रूट किलोमीटर है और इनके निर्माण पर 20,700 करोड़ रुपये से अधिक खर्च हुए हैं। इससे जेएनपीटी जैसे प्रमुख समुद्री बंदरगाह तक माल की आवाजाही तेज होगी।
माल ढुलाई की रफ्तार और क्षमता बढ़ेगी
DFC के पूरी तरह चालू होने से मालगाड़ियों को यात्री ट्रेनों के लिए इस्तेमाल होने वाले व्यस्त रेल मार्गों से अलग रास्ता मिलेगा। इससे माल की ढुलाई अधिक तेज, समयबद्ध और भरोसेमंद होने के साथ पारंपरिक रेल नेटवर्क पर दबाव भी कम होगा। रेलवे के अनुसार, अगस्त 2026 तक DFC पर करीब 5.21 लाख मालगाड़ी यात्राएं हो चुकी हैं और प्रतिदिन औसतन करीब 435 ट्रेनें संचालित हो रही हैं।
इस कॉरिडोर से कंटेनर, कोयला, सीमेंट, खाद्यान्न, उर्वरक, पेट्रोलियम उत्पाद और ऑटोमोबाइल समेत विभिन्न प्रकार के माल की तेज आवाजाही को बढ़ावा मिलेगा। इससे लॉजिस्टिक्स लागत घटाने और देश के औद्योगिक क्षेत्रों को बंदरगाहों से बेहतर तरीके से जोड़ने में मदद मिलने की उम्मीद है।
DFC को भारत के परिवहन और लॉजिस्टिक्स ढांचे की महत्वपूर्ण रीढ़ माना जा रहा है। इसके पूर्ण संचालन से माल ढुलाई की क्षमता बढ़ने के साथ आर्थिक गतिविधियों और आपूर्ति श्रृंखला को भी गति मिलने की उम्मीद है।




