नई दिल्ली: देश में अनुसूचित जनजाति (एसटी) श्रेणी से संबंधित डी-लिस्टिंग और धर्मांतरण के मुद्दे को लेकर आदिवासी संगठनों के एक प्रतिनिधिमंडल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। इस दौरान प्रतिनिधियों ने अपने समुदाय से जुड़े विभिन्न सामाजिक और संवैधानिक मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की।
सूत्रों के अनुसार, यह प्रतिनिधिमंडल जनजाति सुरक्षा मंच से जुड़ा हुआ था, जिसमें विभिन्न राज्यों से आए आदिवासी नेता शामिल थे। बैठक के दौरान प्रतिनिधियों ने मांग रखी कि उन लोगों को एसटी सूची से बाहर करने पर विचार किया जाए जिन्होंने धर्म परिवर्तन कर लिया है, साथ ही जनजातीय पहचान और अधिकारों की सुरक्षा को मजबूत करने पर जोर दिया गया।
प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि जनजातीय समाज की सांस्कृतिक पहचान, परंपराएं और सामाजिक संरचना को सुरक्षित रखना आवश्यक है। उनका कहना था कि इस विषय पर लंबे समय से विभिन्न स्तरों पर चर्चा चल रही है और अब इस पर स्पष्ट नीति की आवश्यकता है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रतिनिधिमंडल की बातों को ध्यानपूर्वक सुना और जनजातीय समुदाय के विकास, सशक्तिकरण और कल्याण को सरकार की प्राथमिकता बताया। उन्होंने कहा कि सरकार आदिवासी समाज के समग्र विकास के लिए लगातार काम कर रही है और विभिन्न योजनाओं के माध्यम से उन्हें मुख्यधारा से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।
बैठक के दौरान शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और जनजातीय क्षेत्रों के विकास जैसे विषयों पर भी विचार-विमर्श हुआ। प्रतिनिधियों ने इन क्षेत्रों में और अधिक प्रभावी कदम उठाने की मांग की।
गौरतलब है कि पिछले कुछ वर्षों में देश के विभिन्न हिस्सों में डी-लिस्टिंग को लेकर बहस तेज हुई है। कुछ संगठनों का मानना है कि धर्म परिवर्तन करने वालों की एसटी सूची में स्थिति पर पुनर्विचार होना चाहिए, जबकि इस मुद्दे पर अलग-अलग मत भी सामने आते रहे हैं।
इस मुलाकात को जनजातीय मुद्दों पर एक महत्वपूर्ण संवाद के रूप में देखा जा रहा है, जिसमें समुदाय की चिंताओं और सरकार की नीतियों पर चर्चा हुई।





