नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि टूटे हुए चावल (ब्रोकन राइस) का इस्तेमाल एथनॉल उत्पादन में किए जाने से देश में महंगाई पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ा है। सरकार के अनुसार, एथनॉल ब्लेंडिंग कार्यक्रम के तहत केवल अतिरिक्त और अधिशेष खाद्यान्न का ही उपयोग किया जा रहा है, जिससे खाद्य सुरक्षा प्रभावित नहीं होती।
सरकार ने बताया कि पेट्रोल में एथनॉल मिश्रण बढ़ाने की नीति का उद्देश्य कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम करना, किसानों को बेहतर बाजार उपलब्ध कराना और पर्यावरणीय लाभ हासिल करना है। इसके लिए ऐसे खाद्यान्न का उपयोग किया जा रहा है जो मानव उपभोग के लिए उपयुक्त नहीं है या जो अतिरिक्त भंडार में उपलब्ध है।
केंद्र के मुताबिक, खाद्यान्न की उपलब्धता और बफर स्टॉक की जरूरतें पूरी करने के बाद ही एथनॉल उत्पादन के लिए चावल उपलब्ध कराया जाता है। सरकार का कहना है कि इस प्रक्रिया का खुदरा खाद्य महंगाई पर कोई महत्वपूर्ण असर नहीं पड़ा है।
एथनॉल ब्लेंडिंग कार्यक्रम के तहत सरकार पेट्रोल में एथनॉल की मात्रा बढ़ाने पर काम कर रही है। इसके जरिए पेट्रोलियम आयात में कमी लाने और घरेलू स्तर पर वैकल्पिक ईंधन को बढ़ावा देने का लक्ष्य रखा गया है।
खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय के अनुसार, टूटे चावल की घरेलू उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए समय-समय पर नीतिगत कदम उठाए गए हैं। इसका इस्तेमाल पशु चारे और एथनॉल उत्पादन जैसे क्षेत्रों में भी किया जाता है।
सरकार ने यह भी कहा कि एथनॉल उत्पादन के लिए फसल और खाद्यान्न के उपयोग में संतुलन बनाए रखा जा रहा है, ताकि किसानों के हित, ऊर्जा सुरक्षा और खाद्य सुरक्षा तीनों उद्देश्यों को साथ लेकर आगे बढ़ा जा सके।





