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चुनावी धांधली के आरोपों पर CJI सूर्यकांत ने राहुल-खरगे से मिलने से किया इनकार, कहा- याचिका दाखिल करें

नई दिल्ली। कथित चुनावी धांधली और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर इंडी गठबंधन को सुप्रीम कोर्ट से झटका लगा है। भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने विपक्षी नेताओं के प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात करने से इनकार कर दिया है। उन्होंने कहा कि जिन मुद्दों को विपक्ष उठाना चाहता है, वे पहले से ही अदालत के विचाराधीन हैं। ऐसे में विपक्ष को मुलाकात के बजाय उचित कानूनी प्रक्रिया के तहत याचिका दाखिल करनी चाहिए। 

कांग्रेस और इंडी गठबंधन के नेताओं ने सोमवार को कथित चुनावी धांधली के मुद्दे पर मुख्य न्यायाधीश को ज्ञापन सौंपने के लिए सुप्रीम कोर्ट तक मार्च निकालने की योजना बनाई थी। विपक्ष ने इसके लिए शाम चार से पांच बजे के बीच CJI से मुलाकात का समय मांगा था।

हालांकि, मुख्य न्यायाधीश ने ईमेल के जरिए भेजे गए जवाब में मुलाकात से इनकार कर दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि सुप्रीम कोर्ट में किसी राजनीतिक दल के प्रतिनिधिमंडल से इस तरह प्रशासनिक स्तर पर मुलाकात करने की व्यवस्था नहीं है। अदालत का काम याचिकाओं पर सुनवाई करना और कानून के अनुसार फैसला देना है।

मौलिक अधिकारों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध अदालत

CJI सूर्यकांत ने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय के दरवाजे सभी नागरिकों के लिए खुले हैं और अदालत प्रत्येक नागरिक के मौलिक अधिकारों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। विपक्ष अपनी शिकायतों और चिंताओं को उचित कानूनी प्रक्रिया के तहत अदालत के सामने रख सकता है।

ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग

इंडी गठबंधन के नेता मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। विपक्ष का आरोप है कि SIR प्रक्रिया में अनियमितताएं हुई हैं और चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल खड़े हुए हैं। विपक्षी दल इन आरोपों को लेकर लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं।

इससे पहले 9 अक्टूबर को विपक्षी नेताओं के एक प्रतिनिधिमंडल ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से मुलाकात कर अपनी चिंताओं से अवगत कराया था। विपक्ष का दावा है कि चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए कार्रवाई जरूरी है।

राहुल गांधी ने मार्च में शामिल होने की अपील की

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने सुप्रीम कोर्ट तक प्रस्तावित मार्च में विपक्षी दलों, नागरिक समाज और आम लोगों से शामिल होने की अपील की थी। उन्होंने इसे लोकतंत्र और मतदान के अधिकार से जुड़ा मुद्दा बताया।

CJI के इनकार के बाद भी विपक्ष की ओर से मार्च की योजना पर आगे बढ़ने की बात कही गई। हालांकि, चुनावी धांधली से जुड़े आरोप विपक्ष के दावे हैं और इन पर अंतिम निष्कर्ष संबंधित कानूनी प्रक्रिया के बाद ही निकाला जा सकता है।

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