नई दिल्ली। खाद्य पदार्थों और पोषण उत्पादों के विज्ञापनों में किए जा रहे स्वास्थ्य संबंधी दावों पर भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने सख्ती दिखाई है। प्राधिकरण ने नेस्ले इंडिया और जायडस वेलनेस सहित कई कंपनियों को नोटिस जारी कर उनके उत्पादों के विज्ञापनों में किए गए दावों के समर्थन में वैज्ञानिक प्रमाण मांगे हैं। मामला बच्चों की लंबाई और विकास, याददाश्त, रोग प्रतिरोधक क्षमता तथा शिशु आहार से जुड़े दावों का है।
कॉम्प्लान के ‘दोगुनी तेजी से विकास’ के दावे पर सवाल
FSSAI ने जायडस वेलनेस के लोकप्रिय पोषण पेय कॉम्प्लान के विज्ञापनों और पैकेजिंग पर दर्ज कुछ दावों पर सवाल उठाए हैं। इनमें ‘2X Faster Growth’, ‘Supports Concentration and Memory’ और ‘Pro Immunity + 34 Vital Nutrients’ जैसे दावे शामिल हैं।
प्राधिकरण ने इन दावों के समर्थन में वैज्ञानिक प्रमाण मांगे हैं। साथ ही, ‘Growth Comes in 4 Flavours’ विज्ञापन संबंधी दावे को भी नियमों के अनुरूप नहीं माना है। कंपनी से निर्धारित समयसीमा में जवाब देने को कहा गया है।
नेस्ले के लैक्टोजेन और नैन उत्पाद भी जांच के दायरे में
नेस्ले इंडिया के लैक्टोजेन प्रो 1 पाउडर पर किए गए इस दावे के समर्थन में वैज्ञानिक साक्ष्य मांगे गए हैं कि इसमें मौजूद व्हे प्रोटीन आसानी से पच जाता है।
वहीं, नैन एक्सेला प्रो स्टेज 1 पर ‘5 HMOs helps support normal immune system’ दावे को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। FSSAI के अनुसार, ऐसे दावों को लागू नियमों के अनुरूप होना चाहिए और जहां आवश्यक हो, उनके समर्थन में पर्याप्त वैज्ञानिक प्रमाण प्रस्तुत करने होंगे।
शिशु आहार के प्रचार पर भी निगरानी
प्राधिकरण ने सोशल मीडिया पर शिशु आहार उत्पादों के कथित प्रचार को लेकर भी कार्रवाई की है। इस मामले में नेस्ले इंडिया, एबॉट हेल्थकेयर, न्यूट्रिशिया इंटरनेशनल, मीड जॉनसन न्यूट्रिशन इंडिया और एक सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर को नोटिस दिए जाने की जानकारी सामने आई है। प्राधिकरण ने संबंधित प्रचार सामग्री की जांच करते हुए लागू कानूनों और नियमों के अनुपालन पर जवाब मांगा है।
कंपनियों से मांगा जवाब
FSSAI की इस कार्रवाई का उद्देश्य खाद्य उत्पादों के विज्ञापनों में किए जाने वाले स्वास्थ्य और पोषण संबंधी दावों की सत्यता सुनिश्चित करना है। हालांकि, नोटिस जारी होना अंतिम दोषसिद्धि नहीं है। संबंधित कंपनियों को अपना पक्ष रखने और दावों के समर्थन में प्रमाण प्रस्तुत करने का अवसर दिया गया है।





