बेंगलुरु। तमिलनाडु को कावेरी नदी का पानी छोड़े जाने के विरोध में गुरुवार को कर्नाटक बंद का आह्वान किया गया। बंद का राज्यभर में मिला-जुला असर देखने को मिला। कावेरी बेसिन के इलाकों में प्रदर्शन और बंद का प्रभाव अधिक रहा, जबकि बेंगलुरु और मैसूरु जैसे प्रमुख शहरों में जनजीवन largely सामान्य रहा।
बंद का आह्वान कन्नड़ संगठनों के नेता वटल नागराज के नेतृत्व में किया गया था। प्रदर्शनकारी संगठनों की मुख्य मांग कर्नाटक से तमिलनाडु के लिए कावेरी जल छोड़े जाने पर रोक लगाने की है। कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण (CWMA) और कावेरी जल विनियमन समिति (CWRC) के निर्देश के बाद कर्नाटक को तमिलनाडु के लिए 15 दिनों तक प्रतिदिन 12,000 क्यूसेक पानी छोड़ने को कहा गया है। इसी फैसले के विरोध में कन्नड़ संगठनों ने बंद का आह्वान किया।
मंड्या में प्रदर्शन तेज
कावेरी बेसिन के प्रमुख जिले मंड्या में बंद का असर सबसे ज्यादा दिखाई दिया। प्रदर्शनकारियों ने सड़कों पर उतरकर सरकार के खिलाफ नारेबाजी की और तमिलनाडु को पानी देने के फैसले का विरोध किया। कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस ने कई स्थानों पर एहतियाती हिरासत भी की।
हालांकि राजधानी बेंगलुरु में बंद का प्रभाव अपेक्षाकृत सीमित रहा। बाजार, कार्यालय और सामान्य गतिविधियां काफी हद तक जारी रहीं। मैसूरु समेत कई अन्य शहरों में भी रोजमर्रा का जनजीवन प्रभावित नहीं हुआ।
लंबे समय से जारी है विवाद
कावेरी जल बंटवारे को लेकर कर्नाटक और तमिलनाडु के बीच लंबे समय से विवाद चला आ रहा है। कर्नाटक अपनी पेयजल और कृषि जरूरतों का हवाला देता रहा है, जबकि तमिलनाडु कावेरी जल पर अपनी सिंचाई निर्भरता को आधार बनाकर निर्धारित हिस्से की मांग करता है। ताजा बंद ने एक बार फिर दोनों राज्यों के बीच इस संवेदनशील जल विवाद को राजनीतिक और सामाजिक बहस के केंद्र में ला दिया है।





