देहरादून/भरारीसैंण: उत्तराखंड विधानसभा का अत्यंत महत्वपूर्ण बजट सत्र आज, 9 मार्च 2026 से शुरू हो रहा है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व वाली सरकार इस बार राज्य के इतिहास का अब तक का सबसे बड़ा और महत्वाकांक्षी बजट पेश करने जा रही है। सूत्रों के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए यह बजट ₹1.10 लाख करोड़ से अधिक का होने का अनुमान है, जो पिछले वर्ष के मुकाबले करीब 15% से 20% की बढ़ोतरी दर्शाता है।
बजट की मुख्य प्राथमिकताएं: बुनियादी ढांचा और स्वरोजगार
इस बजट में सरकार का मुख्य फोकस राज्य को 2027 तक ‘आत्मनिर्भर’ बनाने और ‘सशक्त उत्तराखंड @25’ के लक्ष्य को प्राप्त करने पर होगा:
- कृषि और बागवानी: पहाड़ी क्षेत्रों में सेब और कीवी के उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए बड़े वित्तीय प्रावधान किए जाने की उम्मीद है।
- पर्यटन का कायाकल्प: ‘मानसखंड मंदिर माला मिशन’ और ‘चारधाम’ के बुनियादी ढांचे को विश्वस्तरीय बनाने के लिए भारी बजट आवंटित किया जा सकता है।
- युवा और शिक्षा: युवाओं को स्वरोजगार से जोड़ने के लिए नई स्टार्ट-अप योजनाओं और सरकारी स्कूलों के ‘स्मार्ट’ परिवर्तन के लिए विशेष फंड की घोषणा संभव है।
सत्र का आगाज: राज्यपाल के अभिभाषण से होगी शुरुआत
बजट सत्र की शुरुआत आज सुबह 11 बजे राज्यपाल के अभिभाषण के साथ होगी:
- सरकार की उपलब्धियां: राज्यपाल अपने संबोधन में पिछले एक वर्ष में सरकार द्वारा उठाए गए कड़े कदमों, जैसे समान नागरिक संहिता (UCC) और नकल विरोधी कानून की सफलता का उल्लेख करेंगे।
- सुरक्षा के कड़े इंतजाम: विधानसभा भवन (देहरादून और गैरसैंण के प्रतीकात्मक महत्व को देखते हुए) के आसपास सुरक्षा की चाक-चौबंद व्यवस्था की गई है। धारा 144 लागू कर दी गई है ताकि सदन की कार्यवाही में कोई बाधा न आए।
विपक्ष की घेराबंदी: हंगामे के आसार
जहाँ सरकार इस बजट को ‘जन-कल्याणकारी’ बता रही है, वहीं विपक्ष (कांग्रेस) ने इसे घेरने की पूरी रणनीति बना ली है:
- महंगाई और बेरोजगारी: नेता प्रतिपक्ष ने कहा है कि सरकार केवल आंकड़ों का जाल बुन रही है, जबकि धरातल पर बेरोजगारी और महंगाई चरम पर है।
- अंकिता भंडारी केस और भर्ती घोटाले: विपक्ष इन मुद्दों पर काम रोको प्रस्ताव लाकर सदन में चर्चा की मांग करेगा, जिससे सत्र के पहले दिन से ही हंगामे की स्थिति बन सकती है।
राजस्व प्राप्ति और खर्च का अनुमान
इस ₹1.10 लाख करोड़ के बजट में सरकार का जोर केंद्र से मिलने वाली सहायता और राज्य के अपने कर राजस्व (GST और आबकारी) को बढ़ाने पर है। बजट के माध्यम से राज्य के ऋण भार को कम करने और पूंजीगत व्यय (Capital Expenditure) को बढ़ाने की कोशिश की जाएगी ताकि दीर्घकालिक विकास सुनिश्चित हो सके।





