हल्द्वानी। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद द्वारा एमबीपीजी महाविद्यालय, हल्द्वानी में आपातकाल की स्मृति में एक विशेष हस्ताक्षर अभियान आयोजित किया गया। इस अभियान का उद्देश्य युवाओं को लोकतंत्र के महत्व, नागरिक अधिकारों तथा अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के प्रति जागरूक करना था।इस अवसर पर वक्ताओं ने कहा कि 25 जून 1975 को लगाया गया आपातकाल भारतीय लोकतंत्र के इतिहास का एक महत्वपूर्ण और सीख देने वाला अध्याय है। इससे हमें यह समझने का अवसर मिलता है कि लोकतंत्र केवल चुनावों तक सीमित नहीं है, बल्कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, नागरिक अधिकारों की सुरक्षा और संवैधानिक संस्थाओं की मजबूती पर भी आधारित है।
परिषद के कार्यकर्ताओं ने कहा कि इस अभियान का उद्देश्य किसी व्यक्ति या राजनीतिक दल के विरोध में नहीं, बल्कि युवाओं में लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति जागरूकता बढ़ाना है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की रक्षा और उसे मजबूत बनाए रखना प्रत्येक नागरिक, विशेषकर युवाओं की जिम्मेदारी है।कार्यक्रम में उपस्थित छात्र-छात्राओं को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि हमें इतिहास से सीख लेते हुए ऐसे भारत के निर्माण में योगदान देना चाहिए, जहां संविधान, नागरिकों की स्वतंत्रता और उनके अधिकार सदैव सुरक्षित रहें।
अभियान में महाविद्यालय के सैकड़ों छात्र-छात्राओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया तथा हस्ताक्षर कर लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की। इस अवसर पर विभाग संगठन मंत्री कैलाश बिष्ट, विश्वविद्यालय कार्य संयोजक सूरज सिंह रमोला, विभाग संयोजक निखिल सोनकर, जिला संयोजक धीरज गड़कोटी, धीरज बिष्ट, आर्यन बेलवाल, यतिन पांडे सहित एबीवीपी के अनेक कार्यकर्ता एवं छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।





