नई दिल्ली। नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने आंसर की को चुनौती देने के लिए लिए जाने वाले शुल्क को लेकर छात्रों की शिकायतों पर सफाई दी है। एजेंसी ने कहा है कि आंसर की चैलेंज की व्यवस्था सभी अभ्यर्थियों के लिए समान और निष्पक्ष है।
एनटीए के अनुसार, आंसर की चैलेंज का उद्देश्य केवल किसी एक अभ्यर्थी की आपत्ति का समाधान करना नहीं है, बल्कि परीक्षा में शामिल सभी छात्रों के हितों की रक्षा करना है। यदि कोई अभ्यर्थी किसी प्रश्न के उत्तर को गलत मानते हुए चुनौती देता है और विषय विशेषज्ञ उसकी आपत्ति को सही पाते हैं, तो संशोधित आंसर की का लाभ परीक्षा में शामिल सभी अभ्यर्थियों को मिलता है।
प्रति प्रश्न 200 रुपये शुल्क
छात्रों की ओर से आंसर की चुनौती शुल्क को अधिक बताए जाने के बाद एनटीए ने स्पष्ट किया कि प्रति प्रश्न 200 रुपये का शुल्क निर्धारित है। एजेंसी का कहना है कि यह शुल्क वसूली का उद्देश्य लाभ कमाना नहीं, बल्कि बिना पर्याप्त आधार के की जाने वाली आपत्तियों को हतोत्साहित करना और परिणाम जारी करने की प्रक्रिया में अनावश्यक देरी रोकना है।
एनटीए ने कहा कि यदि हर प्रश्न पर बड़ी संख्या में बिना ठोस आधार के आपत्तियां आने लगें तो विशेषज्ञों द्वारा उनकी जांच में समय लग सकता है और परिणाम प्रभावित हो सकते हैं। इसलिए उम्मीदवारों से अपेक्षा की जाती है कि वे पर्याप्त प्रमाण और शैक्षणिक आधार होने पर ही चुनौती दर्ज करें।
एक सही आपत्ति से लाखों छात्रों को फायदा
एजेंसी ने जोर दिया कि किसी एक उम्मीदवार की सही आपत्ति भी व्यापक असर डाल सकती है। विशेषज्ञों द्वारा चुनौती स्वीकार किए जाने पर संशोधित उत्तर सभी उम्मीदवारों पर लागू किया जाता है। इस तरह आंसर की चैलेंज व्यवस्था को एनटीए ने परीक्षा प्रक्रिया की निष्पक्षता बनाए रखने का माध्यम बताया है।
हालांकि, शुल्क को लेकर छात्रों की नाराजगी के बीच एनटीए की यह सफाई ऐसे समय आई है जब परीक्षा एजेंसी की कार्यप्रणाली को लेकर अभ्यर्थियों की ओर से पारदर्शिता और निष्पक्षता से जुड़े सवाल उठते रहे हैं।





