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अर्थ ग्रुप पर ईडी का बड़ा एक्शन, 140 करोड़ रुपये की संपत्तियां कुर्क; 19,425 निवेशकों से धोखाधड़ी का आरोप

नई दिल्ली। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने कथित मनी लॉन्ड्रिंग और धोखाधड़ी के मामले में अर्थ इन्फ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड, उसकी सहायक कंपनियों और प्रमोटरों की करीब 140 करोड़ रुपये की अचल संपत्तियां कुर्क की हैं। इस मामले में 19,425 से अधिक घर खरीदारों और निवेशकों से करीब 2,004 करोड़ रुपये की कथित धोखाधड़ी का आरोप है। ताजा कार्रवाई के बाद मामले में कुर्क और जब्त संपत्तियों का कुल मूल्य लगभग 352 करोड़ रुपये हो गया है। 

पीएमएलए के तहत कार्रवाई

ईडी के दिल्ली जोनल कार्यालय-दो ने धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के तहत यह कार्रवाई की है। कुर्क की गई संपत्तियां कंपनी, उसके प्रमोटरों अवधेश कुमार गोयल, रजनीश मित्तल, अतुल गुप्ता और विकास गुप्ता, उनके परिवार के सदस्यों तथा संबंधित संस्थाओं से जुड़ी हैं।

जांच एजेंसी के अनुसार, यह मामला बड़े पैमाने पर कथित वित्तीय धोखाधड़ी और निवेशकों की रकम के दुरुपयोग से संबंधित है।

घर और व्यावसायिक इकाइयां देने का किया था वादा

ईडी की जांच के मुताबिक, अर्थ ग्रुप पर आरोप है कि उसने आवासीय और व्यावसायिक परियोजनाओं में समय पर कब्जा देने तथा सुनिश्चित रिटर्न का वादा करके 19,425 से अधिक घर खरीदारों और निवेशकों से लगभग 2,004 करोड़ रुपये जुटाए। आरोप है कि रकम मिलने के बावजूद कई परियोजनाएं अधूरी रह गईं या खरीदारों को उनकी इकाइयों का कब्जा नहीं दिया गया।

जांच एजेंसी का दावा है कि निवेशकों से प्राप्त रकम का एक बड़ा हिस्सा समूह की विभिन्न कंपनियों और संबंधित संस्थाओं के माध्यम से दूसरी जगह भेजा गया। कथित अपराध से प्राप्त रकम के एक हिस्से का इस्तेमाल प्रमोटरों और निदेशकों से जुड़ी संस्थाओं तथा व्यक्तियों के नाम पर संपत्तियां खरीदने में किए जाने की भी जांच की गई है।

पहले भी हुई थी छापेमारी

दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा द्वारा दर्ज पांच प्राथमिकी के आधार पर ईडी ने मामले की जांच शुरू की थी। इसके अलावा, गंभीर धोखाधड़ी जांच कार्यालय (एसएफआईओ) ने भी समूह के प्रमोटरों और निदेशकों के खिलाफ कंपनी अधिनियम की धारा 447 के तहत आपराधिक शिकायत दर्ज कराई है।

अप्रैल 2026 में ईडी ने दिल्ली-एनसीआर में समूह से जुड़े कई ठिकानों पर छापेमारी की थी। इस दौरान करीब 6.30 करोड़ रुपये नकद, 8.78 करोड़ रुपये मूल्य के आभूषण और 100 से अधिक अचल संपत्तियों से संबंधित दस्तावेज जब्त किए गए थे।

ईडी ने प्रमोटरों की भूमिका की जांच के बाद चारों प्रमुख प्रमोटरों को एक जून को गिरफ्तार किया था। मामले में 29 जुलाई को अभियोजन शिकायत भी दाखिल की गई थी। जांच जारी है।

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