वाशिंगटन। अमेरिका की राजनीति में एक ऐतिहासिक बदलाव की संभावना बढ़ गई है। मिशिगन से सीनेट चुनाव के लिए डेमोक्रेटिक पार्टी के प्राइमरी चुनाव में अब्दुल एल-सैयद ने जीत दर्ज की है। उनकी जीत के बाद यदि वे नवंबर में होने वाले आम चुनाव में भी सफल रहते हैं, तो वह अमेरिका के इतिहास के पहले मुस्लिम सीनेटर बन सकते हैं।
अब्दुल एल-सैयद ने मिशिगन सीनेट सीट के लिए डेमोक्रेटिक उम्मीदवार के चयन में अमेरिकी प्रतिनिधि हेली स्टीवंस को करीबी मुकाबले में हराया। इस जीत को डेमोक्रेटिक पार्टी के प्रगतिशील धड़े की बड़ी सफलता के रूप में देखा जा रहा है।
एल-सैयद एक चिकित्सक और पूर्व सार्वजनिक स्वास्थ्य अधिकारी रह चुके हैं। वह इससे पहले 2018 में मिशिगन के गवर्नर पद के लिए भी चुनाव लड़ चुके हैं। उनके अभियान में स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार, सामाजिक सुधार और राजनीतिक व्यवस्था में बदलाव जैसे मुद्दे प्रमुख रहे।
मिशिगन में मिली जीत के बाद अब एल-सैयद का मुकाबला नवंबर में रिपब्लिकन उम्मीदवार माइक रोजर्स से होगा। आम चुनाव में उनकी चुनौती आसान नहीं होगी, क्योंकि मिशिगन को अमेरिकी राजनीति में एक महत्वपूर्ण और प्रतिस्पर्धी राज्य माना जाता है।
एल-सैयद को चुनाव अभियान के दौरान प्रगतिशील नेताओं और जमीनी स्तर के समर्थकों का समर्थन मिला। उन्होंने बड़ी संख्या में स्वयंसेवकों के साथ अभियान चलाया और पारंपरिक राजनीतिक ढांचे से अलग अपनी पहचान बनाने की कोशिश की।
यदि एल-सैयद नवंबर में जीत हासिल करते हैं, तो यह अमेरिकी सीनेट के इतिहास में एक बड़ा बदलाव होगा। अब तक अमेरिका की सीनेट में कोई मुस्लिम सदस्य नहीं रहा है। उनकी संभावित जीत को मुस्लिम-अमेरिकी समुदाय के राजनीतिक प्रतिनिधित्व के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, मिशिगन का यह चुनाव केवल एक सीट का मुकाबला नहीं बल्कि अमेरिकी राजनीति में बदलते सामाजिक समीकरणों और प्रगतिशील विचारधारा के प्रभाव की भी परीक्षा होगा।





